नई दिल्ली। Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी की है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और बाधा उत्पन्न किए जाने के मामले में अदालत ने इसे “असाधारण स्थिति” करार दिया। सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट कहा कि जमीनी हालात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और कानून व्यवस्था से जुड़ी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल कानूनी तर्कों तक सीमित नहीं हो सकती। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की है कि जब न्यायिक अधिकारियों को काम करने से रोका जाता है या दबाव की स्थिति बनती है, तो यह पूरे तंत्र की निष्पक्षता पर असर डालता है। अदालत ने संकेत दिए कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि संस्थागत विश्वास बना रहे।

इस दौरान Mamata Banerjee के कथित हस्तक्षेप को लेकर भी अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई निर्धारित की है, जहां आगे की कार्रवाई और दिशा तय की जाएगी।