
रायगढ़। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में सुरक्षाकर्मियों की जान भगवान भरोसे है। रविवार को घड़ी चौक स्थित जिला न्यायाधीश के निवास पर एक बड़ा हादसा टल गया। यहां ड्यूटी कर रहे एक होमगार्ड जवान पर पुरानी छत का प्लास्टर अचानक भरभरा कर गिर गया। इस हादसे में जवान उमाशंकर पाण्डेय घायल हो गए हैं। उनके पैर में गंभीर चोट आई है। गनीमत यह रही कि सीमेंट का भारी मलबा उनके सिर पर नहीं गिरा वरना उनकी जान भी जा सकती थी।
यह घटना सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर करती है। शहर के बीचोंबीच और एक जज के निवास पर ऐसी बदहाली हैरान करने वाली है। हादसे के तुरंत बाद घायल जवान को प्राथमिक उपचार दिया गया और पट्टी बांधी गई। जवान की जान तो बच गई लेकिन इस घटना ने वीआईपी ड्यूटी में लगे छोटे कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग हर साल सरकारी इमारतों के रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये का बजट पास करता है। लेकिन यह पैसा कहां खर्च हो रहा है यह अब एक बड़ा सवाल बन गया है।
मौके की हालत देखकर साफ पता चलता है कि इमारत बहुत जर्जर हो चुकी है। छत से प्लास्टर पूरी तरह उखड़ कर गिर चुका है। छत के अंदर के लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। इन सरियों में पूरी तरह जंग लग चुका है। इस खस्ताहाल ढांचे के नीचे बैठकर ड्यूटी करना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा है। सालों से इस भवन का कोई मेंटेनेंस नहीं हुआ है। सुरक्षा में लगे जवानों की ड्यूटी कई घंटों की होती है। वे अपनी जगह छोड़कर कहीं और भी नहीं जा सकते। उन्हें मजबूरी में उसी टूटी और खतरनाक छत के नीचे बैठना पड़ता है।
सरकारी नियम कहते हैं कि प्रशासन को अपने कर्मचारियों को काम करने के लिए सुरक्षित माहौल देना चाहिए। लेकिन डीजे जैसे अहम व्यक्ति के बंगले पर ऐसी अनदेखी से विभाग की पोल खुल गई है। ऐसा लगता है कि अधिकारी किसी बड़े हादसे या किसी की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं। आम जनता के मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि जब बड़े अधिकारियों और जजों के बंगले का यह हाल है तो आम सरकारी दफ्तरों की स्थिति क्या होगी। इस घटना के बाद से वहां ड्यूटी करने वाले अन्य सुरक्षाकर्मियों में भी भारी डर का माहौल बन गया है। वे डरे हुए हैं कि कहीं अगला नंबर उनका ना हो।
प्रशासन और संबंधित विभाग को तुरंत नींद से जागना चाहिए। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को इस लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस जर्जर भवन का बिना देरी किए निरीक्षण करवाया जाना चाहिए। जो हिस्से खतरनाक हो चुके हैं उन्हें तुरंत गिराकर नया बनाया जाना चाहिए। अगर समय रहते मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी अनहोनी पक्की है। कर्मचारियों की जान की कीमत समझना अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। बजट को सिर्फ कागजों तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर काम करने की सख्त जरूरत है।




