
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अफसर न ही सरकार के निर्देश मानते है न हाईकोर्ट का आदेश मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की साफ-सुथरी और आदिवासी हितैषी छवि को खराब करने का कोई मौका यहां विभागीय अधिकारी नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला ई-श्रेणी पंजीयन में बड़ा गोलमाल करने और दागी अफसरों को नियम-कायदे ताक पर रखकर संरक्षण देने का है।
तात्कालिक भूपेश सरकार ने अक्टूबर 2020 में बेरोजगार स्नातक युवाओं को रोजगार देने के लिए 'ई-श्रेणी' बनाई थी। नियम था कि इन बेरोजगारों को उनके ही निवास ब्लॉक की सीमा के भीतर नए निर्माण कार्यों का ठेका दिया जाएगा। लेकिन जल मौसम प्रौद्योगिकी संभाग क्रमांक-4 के कार्यपालन अभियंता जयंत बिसेन और अधीक्षण अभियंता आई.ए. सिद्धीकी ने मिलकर इस योजना की धज्जियां उड़ा दीं।
यहां ई-श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार रूपेंद्र कुमार साहू को उसके निवास ब्लॉक से बाहर जाकर काम दे दिया गया। नियमानुसार ई-श्रेणी में सिर्फ नए निर्माण कार्य होंगे, लेकिन इन अफसरों ने बिलासपुर उप-संभाग-14 के तहत 20 मई 2026 को 2.20 लाख रुपए का विशुद्ध मेंटेनेंस (अनुरक्षण) का काम रूपेंद्र को दे दिया। यह कार्य लेखा शीर्ष 2701 के तहत दर्ज है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस संभाग में ई-श्रेणी के नाम पर ऐसे लगभग 20 काम गुपचुप तरीके से अपने चहेते ठेकेदारों को बांटे गए हैं और इनका रिकॉर्ड भी दबा दिया गया । 2015 के विभागीय परिपत्र के मुताबिक अनुरक्षण (पीस वर्क) का काम ई-श्रेणी के ठेकेदारों को दिया ही नहीं जा सकता।
विधानसभा में दी गलत जानकारी हाईकोर्ट की भी अवमानना
अधीक्षण अभियंता सिद्धीकी वही अफसर हैं, जिन पर ठेकेदारों को समय से पहले एडिशनल परफॉर्मेंस सिक्योरिटी (APS) की राशि लौटाने का मामला दर्ज है। दिसंबर 2025 में विधानसभा में सरकार ने लिखित जवाब दिया था कि समय पूर्व एपीएस लौटाने के कारण सिद्धीकी पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन कार्रवाई की जगह उन्हें प्रमोशन दे दिया गया। विधायक विद्यावती सिदार के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर विभाग ने गुमराह करते हुए लिख दिया कि सिद्धीकी के खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है।
इतना ही नहीं बिलासपुर हाईकोर्ट ने कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता पद पर हुए प्रमोशन के बाद इनकी पोस्टिंग पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद प्रमुख अभियंता (ईएनसी) जितेंद्र नेताम ने अपने हस्ताक्षर से सिद्धीकी को जल संसाधन मुख्यालय (शिवनाथ भवन) में कार्यकारी मुख्य अभियंता (प्रबोधन) की कुर्सी सौंप दी।
सचिव के दोहरे मापदंड , ठेकेदारों से भी गठजोड़
इस पूरे खेल में विभागीय सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो के भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। एपीएस घोटाले में एक तरफ विजय जामनिक जैसे अधिकारी पर एफआईआर और निलंबन होता है, वहीं सिद्धीकी जैसे समान अपराध वाले अफसरों को बचाया जा रहा है। एपीएस की रकम सीधे ठेकेदारों के खाते में गई, आर्थिक लाभ ठेकेदारों को हुआ, फिर भी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होना सचिव और ठेकेदारों की मिलीभगत का प्रमाण है।
ठेकेदारों को मिल रहे इसी वीआईपी संरक्षण के कारण फील्ड में घटिया काम हो रहे हैं और आए दिन बांध व नहरें टूटने की खबरें आती हैं। विभाग मनमर्जी करते हुए राज्यपाल के नाम से जारी टेंडर की शर्तें इस पूरे मामले में अब माहौल तेजी से बदल रहा है। मांग उठ रही है कि बिसेन और सिद्धीकी को तत्काल सस्पेंड कर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही ई-श्रेणी में बांटे गए सभी 20 कार्यों का स्पेशल ऑडिट हो और ईओडब्ल्यू (EOW) या एसीबी (ACB) से मामले की जांच कराई जाए, ताकि असली बेरोजगारों का हक मारने वालों पर नकेल कसी जा सके।