राजौरी। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में मौसम ने अचानक ऐसा रुख बदला कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तेज बारिश के बीच बादल फटने की घटनाओं के बाद कई इलाकों में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा। देखते ही देखते सड़कें जलधाराओं में तब्दील हो गईं और तेज बहाव अपने साथ गाड़ियां, मकान और दूसरी संपत्तियां बहा ले गया।

राजौरी जिले में इस प्राकृतिक आपदा का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला। थानामंडी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया। स्थानीय स्तर पर करीब 14 स्थानों पर बादल फटने जैसी घटनाओं की सूचना सामने आई है। कई जगहों पर नालों का पानी अचानक उफान पर आ गया, जिसके बाद निचले इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।

कुछ मिनटों में पानी ने बदली पूरी तस्वीर
रात के वक्त हुई तेज बारिश के बाद हालात तेजी से बिगड़े। पहाड़ों से पानी के साथ मलबा और बड़े-बड़े पत्थर नीचे की ओर आने लगे। कई परिवारों ने डर के बीच अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों का रुख किया। राजौरी के राजधानी पंचायत इलाके में बाढ़ का असर बेहद गंभीर बताया जा रहा है। यहां कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि खेत और कृषि योग्य जमीन भी पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गई।

बस स्टैंड में घुसा सैलाब, वाहन बने पानी का हिस्सा
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजौरी के एक बस स्टैंड परिसर तक पानी पहुंच गया। तेज बहाव में खड़े कई वाहन अपनी जगह से खिसक गए। कुछ वाहन पानी और मलबे में फंस गए, जबकि कई के बह जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में सामान्य रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो गए।

एक झटके में उजड़ गया परिवार का आशियाना
राजधानी इलाके में एक परिवार के लिए यह रात जिंदगी भर की त्रासदी बन गई। परिवार के मुताबिक, अचानक आई बाढ़ के दौरान उन्हें घर के भीतर से तेज पानी और पत्थरों के टकराने की आवाजें सुनाई देने लगीं। हालात बिगड़ते देख परिवार किसी तरह घर से बाहर निकल पाया। लेकिन पीछे उनका घर और वर्षों से जुटाया सामान सैलाब में समा गया। बाद में परिवार को सरकारी स्कूल में शरण लेनी पड़ी। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने पहले भी बारिश और बाढ़ देखी है, लेकिन इतनी तेजी से पानी बढ़ते हुए उन्होंने कभी नहीं देखा था।

पहाड़ों पर बारिश, नीचे बस्तियों में बढ़ा खतरा
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने के बाद सबसे बड़ा खतरा अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन का होता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में थोड़े समय में होने वाली बेहद तेज बारिश का पानी जब पहाड़ी नालों में उतरता है, तो उसका बहाव बेहद खतरनाक हो जाता है। इसी वजह से राजौरी और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह रास्ते बाधित हुए हैं। मलबा आने से आवाजाही प्रभावित हुई है और लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

राहत-बचाव में जुटीं टीमें
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों तक राहत पहुंचाना है, जिनके घर और जरूरी सामान बाढ़ में तबाह हो गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से नदी, नाले और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है।

तबाही की तस्वीर अभी पूरी नहीं
राजौरी में सामने आई घटनाओं ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने के खतरे को सामने ला दिया है। बादल फटना, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाएं कुछ ही मिनटों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं। फिलहाल, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है। बारिश और जलभराव की स्थिति सामान्य होने के बाद ही नुकसान का पूरा आकलन सामने आने की उम्मीद है।