
रायपुर। रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम गिरोला में जिस जमीन पर मुरुम और मिट्टी उत्खनन की अनुमति दी गई, वह सामान्य शासकीय भूमि नहीं, बल्कि अभनपुर-खरसिया नई रेललाइन परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर खनिज विभाग ने बाकायदा उत्खनन की अनुमति जारी कर दी। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और अभनपुर एसडीएम ने तत्काल प्रभाव से उत्खनन कार्य पर रोक लगा दी। पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह मामला खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी या फिर गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मिली थी अनुमति
जानकारी के अनुसार, ग्राम गिरोला के खसरा नंबर 445 स्थित भूमि पर तालाब गहरीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए करीब 6 हजार घनमीटर मुरुम और मिट्टी के उत्खनन एवं परिवहन की अनुमति दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, अनुमति जारी करने से पहले खनिज विभाग ने नियमानुसार खनिज निरीक्षक, पटवारी और तहसीलदार से स्थल निरीक्षण एवं सर्वे रिपोर्ट भी प्राप्त की थी। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर लगभग दो महीने के लिए उत्खनन की स्वीकृति जारी की गई।अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था, तो प्रस्तावित रेल परियोजना वाली भूमि की जानकारी अनुमति प्रक्रिया के दौरान सामने क्यों नहीं आई।
चार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होना था उत्खनन
बताया जा रहा है कि अनुमति चार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मुरुम और मिट्टी निकालने के लिए दी गई थी। इसके लिए संबंधित ठेकेदार से विभाग ने तीन से चार लाख रुपये की अग्रिम रॉयल्टी भी जमा कराई थी और विधिवत अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि, जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि संबंधित भूमि नई रेल परियोजना के दायरे में आती है, पूरे मामले पर सवाल उठने लगे। यदि उत्खनन जारी रहता, तो भविष्य में रेल परियोजना के कार्य पर भी असर पड़ सकता था।
रेल परियोजना की जमीन पर कैसे मिली मंजूरी?
सूत्रों के अनुसार, जिस खसरा नंबर पर उत्खनन की अनुमति दी गई, वह अभनपुर से खरसिया तक प्रस्तावित नई रेललाइन परियोजना के लिए चिह्नित या अधिग्रहित भूमि का हिस्सा बताई जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित राजस्व अधिकारियों, पटवारी, राजस्व निरीक्षक (RI) और अन्य विभागीय अधिकारियों को इस तथ्य की जानकारी नहीं थी, या फिर अनुमति जारी करते समय आवश्यक अभिलेखों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि रेल परियोजना की भूमि पर ही उत्खनन की अनुमति दी गई थी, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला माना जा सकता है।
प्रशासन ने रुकवाया उत्खनन
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। अभनपुर एसडीएम रवि सिंह ने बताया कि संबंधित खसरा नंबर की भूमि नई रेल परियोजना के अंतर्गत आती है या नहीं, इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक मुरुम और मिट्टी उत्खनन का कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय समन्वय पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने खनिज और राजस्व विभाग के बीच सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि की स्थिति और स्वामित्व का सही सत्यापन किया गया होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह केवल विभागीय चूक थी या अनुमति जारी करने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। जांच के नतीजे आने के बाद ही तय होगा कि इस मामले में किसकी जवाबदेही तय की जाएगी और क्या संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।