रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगर निगमों में अब तक जो वित्तीय कामकाज और खातों का हिसाब-किताब अपनी सहूलियत या फिर प्राइवेट सीए फर्मों के भरोसे चल रहा था, उस पर राज्य सरकार ने ब्रेक लगा दिया है। अब प्रदेश के सभी 14 नगर पालिका निगमों के खातों की जांच भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) करेंगे। शासन ने नगर निगमों के सर्टिफिकेशन ऑडिट (प्रमाणीकरण लेखा परीक्षा) का पूरा जिम्मा अब सीएजी को सौंप दिया है।

स्थानीय निकायों में ऑडिट के नाम पर अब तक क्या-क्या होता रहा है, यह कोई ढकी-छिपी बात नहीं है। कभी फर्जी बिलिंग की फाइलें पास हो जाती थीं, तो कभी टेंडर में गड़बड़ी की शिकायतें आम रहती थीं। अभी तक स्थानीय निधि संपरीक्षा के जरिए निकायों के आय-व्यय की जांच हो रही थी। कई निगम तो इंटरनल ऑडिट के नाम पर अपनी पसंद की निजी सीए फर्मों की सेवाएं ले लेते थे, जिससे पारदर्शिता पर हमेशा एक पर्दा पड़ा रहता था। अब सीएजी के हाथों में कमान आने से राजस्व संग्रह, विकास कार्यों और निगमों के बजट में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ा अंकुश लगेगा। स्वतंत्र जांच होगी, तो कामकाज में जनता के प्रति जवाबदेही भी बनेगी।

प्रदेश के इन 14 नगर निगमों का सालाना बजट ही 6500 करोड़ रुपए से अधिक का है। सरकार के इस आदेश का असर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, कोरबा, राजनांदगांव, जगदलपुर, अंबिकापुर, रायगढ़, धमतरी, बीरगांव, भिलाई-चरौदा, रिसाली और चिरमिरी नगर निगमों पर पड़ेगा।

इस नए फैसले के पीछे एक बड़ा कारण केंद्रीय फंडिंग की जरूरतें भी हैं। केंद्र सरकार की बड़ी योजनाओं जैसे अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी, पीएम आवास या फिर वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिलने वाले अनुदान के लिए सख्त 'ऑडिट' की शर्त होती है। कैग ऑडिट की मुहर लगने से अब इन निकायों को केंद्र से मिलने वाले फंड के रास्ते की रुकावटें कम होंगी और पैसा आसानी से मिल सकेगा।

देश के कई राज्यों में नगर निगमों के ऑडिट का काम कैग के पास है, हालांकि वहां तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग के मॉडल अलग-अलग हैं। दिल्ली नगर निगम के वित्तीय विवरणों और खातों का नियमित ऑडिट सीएजी द्वारा ही किया जाता है। अब ठीक यही व्यवस्था छत्तीसगढ़ में लागू की जा रही है। सरकार ने अपनी अधिसूचना में बताया है कि यह दायित्व सीएजी अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत सौंपा गया है। कानूनन इस धारा के लागू होने से अब कैग को किसी भी निकाय के पूरे वित्तीय रिकॉर्ड्स, बैंक बैलेंस और खातों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच करने का पूरा वैधानिक अधिकार मिल गया है। अब स्थानीय स्तर की रस्मी जांच से काम नहीं चलेगा, निगमों को पाई-पाई का हिसाब देना होगा।