
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जांजगीर-चांपा के अतिरिक्त कलेक्टर राजकुमार तांबोली के स्थानांतरण मामले में राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। किडनी प्रत्यारोपण के बाद नियमित इलाज की जरूरत का हवाला देकर तबादले को चुनौती देने वाले एडीएम को कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। जस्टिस बी डी गुरु की एकलपीठ ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया है कि तांबोली के अभ्यावेदन पर स्थानांतरण नीति और नियमों के अनुरूप 25 दिन के भीतर कारण सहित निर्णय लिया जाए। तब तक उन्हें जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ रहने की राहत दी गई है।
प्रशासनिक आधार पर हुआ था नारायणपुर तबादला
राज्य शासन ने 29 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर अतिरिक्त कलेक्टर राजकुमार तांबोली का स्थानांतरण जांजगीर-चांपा से नारायणपुर कर दिया था। शासन ने इसके पीछे प्रशासनिक आधार बताया था। आदेश के खिलाफ तांबोली ने उसी दिन सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत कर स्थानांतरण में बदलाव की मांग की। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद बिलासपुर में चल रहा इलाज
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2021 में राजकुमार तांबोली का किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। इसके बाद से उन्हें नियमित चिकित्सा जांच और उपचार के लिए बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में नारायणपुर जैसे दूरस्थ जिले में स्थानांतरण होने से नियमित इलाज जारी रखने में गंभीर कठिनाइयां आ सकती हैं। अधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य की स्थानांतरण नीति में चिकित्सा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखने के प्रावधान हैं। इसलिए तांबोली के मामले में इन परिस्थितियों पर विचार करते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।
राज्य सरकार: नए अधिकारी ने संभाल लिया है पदभार
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के लॉ अफसर ने कोर्ट को बताया कि स्थानांतरण आदेश के पालन में एडीएम प्रमोद कुमार गुप्ता ने जांजगीर-चांपा में पदभार ग्रहण कर लिया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यदि तांबोली का प्रतिवेदन लंबित है, तो उसका नियमानुसार तय समय में निराकरण किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने फिलहाल उन्हें जांजगीर-चांपा में रोकने का आदेश देने का विरोध किया।
25 दिन में बताना होगा फैसले का आधार
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया कि 29 सितंबर को प्रस्तुत प्रतिवेदन पर स्थानांतरण नीति के अनुरूप 25 दिन के भीतर निर्णय लिया जाए। आदेश में निर्णय के कारणों का उल्लेख करना भी जरूरी किया गया है। कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के चलते प्रतिवेदन के निराकरण तक राजकुमार तांबोली जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ रह सकेंगे। अब उनकी याचिका पर आगे की स्थिति राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।