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बिलासपुर : मासूम बच्चों की पीठ पर लदे भारी-भरकम स्कूल बैग को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। बिल्हा विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक ने क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्राचार्यों को निर्देश जारी कर स्कूल बैग पॉलिसी का कड़ाई से पालन कराने को कहा है। साफ चेतावनी दी गई है कि नियमों के पालन में लापरवाही मिलने पर संबंधित संस्था प्रमुख को जिम्मेदार माना जाएगा।
मामले की शुरुआत पिरैया, संकुल सरवानी निवासी अश्वनी साहू की शिकायत से हुई। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करते हुए स्कूलों में बच्चों के भारी बस्ते का मुद्दा उठाया था। शिकायत में कहा गया कि बच्चों को रोजाना जरूरत से ज्यादा किताबें और कॉपियां लेकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए बीईओ कार्यालय ने सभी स्कूलों के लिए नया निर्देश पत्र जारी किया है। इसके तहत भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी, सीबीएसई और केवीएस की स्कूल बैग नीति 2020 का पालन अनिवार्य किया गया है।
टाइम-टेबल ऐसा बने कि रोज न ढोनी पड़े सारी किताबें
नए निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अपना टाइम-टेबल इस तरह तैयार करना होगा कि बच्चों को हर दिन सभी विषयों की किताबें और कॉपियां बैग में लेकर न आना पड़े। जिस दिन जिस विषय की पढ़ाई हो, उसी के अनुसार किताबें और कॉपियां लाने की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।
हर स्कूल में होगी बैग के वजन की जांच
बच्चों के बस्ते का वजन तय मानकों के अनुसार रहे, इसके लिए स्कूल परिसरों में डिजिटल वजन मशीन रखने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर बच्चों के बैग का वजन जांचा जाएगा। स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बस्ता हल्का हो और उसमें दोनों कंधों पर बराबर वजन पड़ने वाली चौड़ी पट्टियां लगी हों।
ट्रॉली बैग पर रोक
सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने के दौरान बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहिए वाले ट्रॉली बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
पानी और भोजन की व्यवस्था पर भी जोर
स्कूलों को साफ पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए कहा गया है, ताकि बच्चों को घर से भारी पानी की बोतलें लेकर न आना पड़े। जहां मध्याह्न भोजन की व्यवस्था लागू है, वहां इसे भी नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बुक बैंक के माध्यम से किताबों के दो सेट उपलब्ध कराने और स्कूल में लॉकर जैसी सुविधाओं की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। वहीं, हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे भी बच्चों के बैग में अनावश्यक किताबें और सामान न रखें।
शिक्षा विभाग के इस सख्त निर्देश के बाद अब बिल्हा विकासखंड के स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। विभाग ने साफ कर दिया है कि बच्चों के कंधों पर जरूरत से ज्यादा बोझ डालने में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।