
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विदेश से MBBS की पढ़ाई कर भारत में इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को बड़ा झटका दिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त डॉक्टरों की इंटर्नशिप फीस वापस करने और अगस्त 2022 से पहले का स्टाइपेंड देने की मांग को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को जमा की गई एक लाख रुपये की फीस वापस नहीं मिलेगी। साथ ही उन्हें अगस्त 2022 से पहले की अवधि का स्टाइपेंड भी नहीं दिया जाएगा।
हाई कोर्ट का यह फैसला उन विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने भारत में अपनी अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान फीस और स्टाइपेंड को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ी थी।
तीन याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
इस मामले में डॉ. श्यामू कुमार जांगड़े सहित 14 डॉक्टरों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके अलावा डॉ. छत्रेश चौधरी और डॉ. प्रणव पांडेय ने भी अलग-अलग याचिकाएं प्रस्तुत की थीं। तीनों मामलों की एक साथ सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ में हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई थी कि उनसे इंटर्नशिप के दौरान वसूली गई एक लाख रुपये की फीस वापस की जाए और जिस तारीख से उन्होंने इंटर्नशिप के लिए पंजीयन कराया था, उसी समय से उन्हें स्टाइपेंड का भुगतान किया जाए। हालांकि, अदालत ने सभी तीनों याचिकाओं को खारिज कर दिया।
एक लाख रुपये इंटर्नशिप फीस वापस करने की थी मांग
याचिकाकर्ता डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में इंटर्नशिप के लिए सिम्स बिलासपुर में प्रवेश लिया था। इस दौरान प्रत्येक डॉक्टर से एक लाख रुपये इंटर्नशिप फीस के रूप में जमा कराए गए थे।
डॉक्टरों ने अपनी मांग के समर्थन में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के 4 मार्च 2022 के दिशा-निर्देश और 19 मई 2022 को जारी परिपत्र का हवाला दिया था। उनका तर्क था कि इन निर्देशों के अनुसार विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त छात्रों से इंटर्नशिप फीस नहीं ली जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें भारतीय मेडिकल छात्रों के समान स्टाइपेंड भी दिया जाना चाहिए।
इसी आधार पर डॉक्टरों ने जमा की गई फीस वापस करने और स्टाइपेंड का भुगतान करने की मांग की थी।
अगस्त 2022 से मिलना शुरू हुआ था स्टाइपेंड
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, सिम्स बिलासपुर में विदेशी मेडिकल डिग्री वाले डॉक्टरों को अगस्त 2022 से स्टाइपेंड मिलना शुरू हुआ था। हालांकि, इससे पहले की इंटर्नशिप अवधि का भुगतान नहीं किया गया।
डॉक्टरों का कहना था कि जब उन्हें भारतीय मेडिकल छात्रों के समान स्टाइपेंड देने का प्रावधान है, तो इंटर्नशिप के लिए पंजीयन की तारीख से इसका लाभ मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित डॉक्टरों ने वर्ष 2015 में ही इंटर्नशिप फीस जमा कर दी थी। वहीं, 24 नवंबर 2022 को आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि 4 मार्च 2022 को जारी NMC के परिपत्र से पहले जमा की गई फीस वापस नहीं की जाएगी।
सरकार की ओर से इसी निर्णय और संबंधित तारीखों के आधार पर फीस वापसी की मांग का विरोध किया गया।
18 नवंबर 2021 की तारीख बनी फैसले का आधार
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि सभी याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने 18 नवंबर 2021 से पहले ही विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त कर ली थी। ऐसे में वे बाद में जारी नए नियमों और दिशा-निर्देशों का लाभ पाने के पात्र नहीं हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि अगस्त 2022 से पहले की अवधि के लिए स्टाइपेंड भुगतान का कोई अन्य लागू प्रावधान सामने नहीं आया, जिसके आधार पर डॉक्टरों को पिछली तारीख से भुगतान का लाभ दिया जा सके।
इन्हीं तथ्यों और नियमों के आधार पर हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की फीस वापसी और पुराने स्टाइपेंड से जुड़ी मांगों को स्वीकार नहीं किया तथा तीनों याचिकाएं खारिज कर दीं।
इस फैसले से सिम्स बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले संबंधित विदेशी मेडिकल स्नातकों को आर्थिक राहत की उम्मीद नहीं रह गई है। अब उन्हें न तो पहले जमा की गई एक लाख रुपये की फीस वापस मिलेगी और न ही अगस्त 2022 से पहले की इंटर्नशिप अवधि का स्टाइपेंड दिया जाएगा।