
Perimenopause Symptoms: महिलाओं की जिंदगी में मेनोपॉज एक नेचुरल बदलाव है. आमतौर पर जब लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, तो इसे मेनोपॉज माना जाता है. लेकिन मेनोपॉज अचानक नहीं होता. इससे पहले शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव शुरू हो सकते हैं, जिन्हें पेरिमेनोपॉज कहा जाता है. कई महिलाएं पेरिमेनोपॉज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखतीं और इसके लक्षणों को सामान्य उम्र से जुड़ा बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं. इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है. इसका असर पीरियड्स के पैटर्न के साथ-साथ नींद, मूड और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी दिखाई दे सकता है.
पीरियड्स में होने लगता है बदलाव
पेरिमेनोपॉज का सबसे आम संकेत पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव माना जाता है. इस दौरान पीरियड्स कभी समय से पहले तो कभी देर से आ सकते हैं. दो पीरियड्स के बीच का अंतर भी बदल सकता है. कुछ महिलाओं में ब्लीडिंग सामान्य से कम, जबकि कुछ में ज्यादा हो सकती है. हालांकि, हर महिला में इसका अनुभव अलग हो सकता है. कुछ महिलाओं में केवल पीरियड्स में बदलाव दिखाई देता है, जबकि कुछ को कई दूसरे शारीरिक और मानसिक लक्षण भी महसूस हो सकते हैं.
हॉट फ्लैशेज से लेकर नींद की परेशानी तक
पेरिमेनोपॉज के दौरान अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना यानी हॉट फ्लैशेज और रात में ज्यादा पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इसके अलावा नींद खराब होना, मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान लगाने में परेशानी भी हो सकती है. कुछ महिलाओं को योनि में सूखापन या सेक्स के दौरान असहजता जैसी समस्या भी हो सकती है. इसके अलावा वजन और शरीर की संरचना में बदलाव भी महसूस हो सकता है.
हर महिला में लक्षण एक जैसे नहीं होते
पेरिमेनोपॉज का अनुभव हर महिला के लिए अलग हो सकता है. किसी में लक्षण काफी हल्के हो सकते हैं, जबकि किसी दूसरी महिला में ये रोजमर्रा के काम और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए लगातार हो रहे बदलावों को केवल उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. अगर लक्षण ज्यादा परेशान कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
35 से 40 की उम्र के बाद हेल्थ पर दें खास ध्यान
मिड-लाइफ में महिलाओं के लिए अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सजग रहना जरूरी हो जाता है. संतुलित डाइट के साथ पर्याप्त प्रोटीन और कैल्शियम लेना, नियमित एक्सरसाइज करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को मैनेज करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है. इस दौरान हड्डियों की सेहत, वजन, ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है. धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचना भी बेहतर माना जाता है.
हर हार्मोनल बदलाव बीमारी नहीं
पेरिमेनोपॉज को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी मौजूद हैं. शरीर में हार्मोनल बदलाव होने का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को कोई बीमारी है या उसे हार्मोन थेरेपी की जरूरत होगी. किसी भी तरह के उपचार का फैसला लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और महिला की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए. इसी तरह अनियमित पीरियड्स को हमेशा पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज का संकेत मानना भी सही नहीं है. इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है, पीरियड्स लंबे समय तक बंद रहने के बाद दोबारा ब्लीडिंग शुरू हो गई है या लक्षण इतने ज्यादा हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. सही जानकारी, समय पर मेडिकल सलाह और हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है. इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी लगातार या गंभीर लक्षण की स्थिति में योग्य डॉक्टर से परामर्श लें.