रायपुर। महादेव सट्टा एप के प्रमोटर अब बुरी तरह फंस चुके हैं। बाजार से सट्टे का पैसा वसूल करना उनके लिए काफी मुश्किल हो गया है। इसलिए अब वे सट्टेबाजी के पैनल बेचकर अपना मोटा पैसा निकाल रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी अब एक और बड़ी चोट करने जा रहा है। ईडी जल्द ही इस बड़े मामले में एक नया केस दर्ज करेगा।

जांच एजेंसी ने रायपुर के राजेंद्र नगर थाने से 26 फरवरी को दर्ज मामले की डायरी तलब कर ली है। पुलिस ने अभी जुआ एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। लेकिन ईडी ने पुलिस कमिश्नर को साफ निर्देश दिया है कि इस मामले में आपराधिक साजिश की धारा 120बी और जालसाजी की धारा 318 जोड़ी जाए। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू कर सके। ईडी की टीम ने क्राइम ब्रांच और थाने जाकर आरोपियों की पूरी कुंडली भी निकाल ली है।

सट्टे की काली कमाई अब नए रास्तों से दुबई पहुंच रही है। गोवा में पकड़े गए सटोरियों ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। इन लोगों ने करीब 46500 क्रिप्टो करेंसी विदेश भेजी है। इनके खातों की जांच में दो करोड़ रुपये के लेन देन और विदेशी निवेश का पक्का सुबूत मिला है। हवाला का यह अवैध नेटवर्क अब गोवा से लेकर दुबई तक पूरी तरह फैल चुका है।

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कोरबा का प्रतीक विधवानी और अमलीडीह का सैंकी दवेड़ा इस बड़े नेटवर्क को चला रहे थे। पहले प्रतीक खुद सट्टा चलाता था। बाद में वह दुबई में बैठे सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल से सीधे जुड़ गया। प्रतीक ने धनंजय वैष्णव प्रमोद ओरके साकेत जगवानी प्रकाश चंद्र मिरी और शंकर राम को बीस बीस हजार रुपये महीने की पगार पर रखा। इन सभी लड़कों को काम करने के लिए गोवा शिफ्ट कर दिया गया।

ये लोग रोज की वसूली का हिसाब बैंक की तरह एक बैलेंस शीट में रखते थे। प्रतीक दुबई में बैठे आकाओं को क्यूआर कोड भेजता था। इस कोड में सट्टे का पैसा जमा कराया जाता था। इसके बाद यह सारी रकम डॉलर ब्रोकर के जरिए दुबई हवाला कर दी जाती थी।

दुबई में बैठे सौरभ चंद्राकर रवि उप्पल और शुभम सोनी ने अब छत्तीसगढ़ से बाहर दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में अपना जाल बिछा दिया है। आईपीएल शुरू होने से पहले बड़े पैमाने पर पैनल बेचे गए हैं। एक पैनल की कीमत 35 से 40 लाख रुपये तक रखी गई है। अब सट्टे वाले दांव के पैनल के साथ साथ पैसा इधर उधर करने के लिए हवाला वाले वित्तीय पैनल भी दिए जा रहे हैं। इसमें एजेंटों को 10 से 15 प्रतिशत का भारी मुनाफा दिया जा रहा है। पैसा वसूलने के लिए चाइनीज एप का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। इन एप्स में बैंक खातों और क्यूआर कोड से लेन देन होता है ताकि पुलिस इन्हें आसानी से ट्रैक न कर सके।