
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपी व्याख्याता जीवन प्रसाद देवांगन के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) छत्तीसगढ़ के संचालक ने आरोपी व्याख्याता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने और आरोपी के 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने के बाद की गई है। निलंबन आदेश को 10 अक्टूबर 2026 से प्रभावी माना गया है।
मामला महासमुंद जिले के शासकीय हाई स्कूल अछोला का है, जहां व्याख्याता जीवन प्रसाद देवांगन पर कक्षा 9वीं की नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि आरोपी शिक्षक विद्यालय परिसर में शराब का सेवन करता था। इन आरोपों की प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें शिकायतों की पुष्टि होने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
छात्रा से छेड़छाड़ और शराब सेवन की शिकायत
मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा और उसके परिजनों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपों को गंभीरता से लिया गया। साथ ही विद्यालय परिसर में शराब सेवन की शिकायत को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विभाग ने प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी।
पॉक्सो एक्ट और BNS की धाराओं में दर्ज है केस
आरोपी व्याख्याता के खिलाफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75(1) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा नाबालिग से जुड़े अपराध होने के कारण उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और 10 भी लगाई गई है। पुलिस ने आरोपी को 10 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
सरकारी सेवा नियमों के अनुसार, किसी सरकारी कर्मचारी के 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने पर उसे निलंबित किया जा सकता है। इसी नियम के तहत लोक शिक्षण संचालनालय ने यह कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किया।
निलंबन अवधि में रहेगा मुख्यालय निर्धारित
विभागीय आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान व्याख्याता का मुख्यालय विभाग द्वारा निर्धारित रहेगा। इस दौरान उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी। साथ ही मामले की विभागीय जांच भी आगे जारी रहेगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने दिखाई सख्ती
नाबालिग छात्रा से जुड़े इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप पूरी तरह साबित होते हैं तो नियमानुसार आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
