कई लोगों को लगता है कि अगर शरीर का वजन ज्यादा है और दिन में भरपेट भोजन मिल रहा है, तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो सकती। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। शरीर का वजन ज्यादा होना और शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। कोई व्यक्ति ओवरवेट या मोटापे का शिकार होने के बावजूद विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन या अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी से जूझ सकता है। खासकर शहरी जीवनशैली में ज्यादा कैलोरी लेकिन कम पोषण वाला भोजन इस समस्या को बढ़ा सकता है। पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ पेट तो भर सकते हैं, लेकिन इनमें शरीर की जरूरत के मुताबिक प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में हों, यह जरूरी नहीं है।

वजन ज्यादा होने के बावजूद पोषण की कमी कैसे?
शरीर को सिर्फ कैलोरी की जरूरत नहीं होती। उसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति की डाइट में कैलोरी तो बहुत ज्यादा है, लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ कम हैं, तो वजन बढ़ने के बावजूद पोषण संबंधी कमी हो सकती है। उदाहरण के लिए, ज्यादा तला-भुना खाना, मीठे खाद्य पदार्थ या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनसे शरीर को जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर्याप्त मात्रा में मिलें, यह जरूरी नहीं है।

सिर्फ BMI से पूरी सेहत का पता नहीं चलता
शरीर के वजन और लंबाई के आधार पर निकाला जाने वाला BMI स्वास्थ्य का एक सामान्य संकेतक है, लेकिन इससे शरीर में मौजूद फैट का वितरण या मांसपेशियों और चर्बी का अनुपात पूरी तरह पता नहीं चलता। खास तौर पर विसरल फैट, यानी पेट के अंदरूनी हिस्से में अंगों के आसपास जमा चर्बी, स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकती है। किसी व्यक्ति का BMI सामान्य होने के बावजूद शरीर में फैट का वितरण अस्वस्थ हो सकता है। इसलिए केवल वजन मशीन पर दिखाई देने वाली संख्या को देखकर पूरी मेटाबॉलिक हेल्थ का अनुमान लगाना सही नहीं है।

ज्यादा कैलोरी, लेकिन पोषण कम क्यों?
शहरी जीवनशैली में खान-पान का पैटर्न तेजी से बदला है। काम की व्यस्तता के कारण कई लोग घर के संतुलित भोजन की जगह बाहर का खाना, इंस्टेंट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे पेय ज्यादा लेने लगते हैं। ऐसी डाइट में कैलोरी अधिक हो सकती है, जबकि प्रोटीन, फाइबर और कुछ विटामिन-मिनरल्स की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। यही वजह है कि वजन बढ़ने के साथ-साथ कुछ पोषक तत्वों की कमी भी बनी रह सकती है।

Vitamin D की कमी भी हो सकती है
विटामिन D शरीर में हड्डियों, मांसपेशियों और कई अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। जिन लोगों का अधिकांश समय घर या ऑफिस के अंदर बीतता है, उनमें पर्याप्त धूप न मिलने के कारण विटामिन D का स्तर कम हो सकता है। मोटापे और विटामिन D के कम स्तर के बीच संबंध पर भी शोध हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर अधिक वजन वाले व्यक्ति में विटामिन D की कमी होगी। इसकी वास्तविक स्थिति जांच के जरिए ही पता चल सकती है।

वजन घटाने के चक्कर में पोषण से समझौता न करें
वजन कम करने का मतलब सिर्फ भोजन की मात्रा को बहुत कम कर देना नहीं है। कई लोग तेजी से वजन घटाने के लिए खाना छोड़ देते हैं या कार्बोहाइड्रेट समेत कई खाद्य समूह पूरी तरह बंद कर देते हैं। इससे कुल कैलोरी तो कम हो सकती है, लेकिन जरूरी पोषक तत्वों की कमी का खतरा भी बढ़ सकता है। वजन नियंत्रित करते समय डाइट में दालें, अंडे, दूध या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, नट्स और बीज जैसे विविध खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर होता है। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जरूरत के अनुसार डाइट अलग हो सकती है।

मोटापे के साथ इन समस्याओं का भी बढ़ सकता है जोखिम
अधिक वजन और खासकर पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी का संबंध कुछ मेटाबॉलिक समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से हो सकता है। इनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, प्री-डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां शामिल हैं। इसीलिए सिर्फ वजन कम करने पर ध्यान देने के बजाय कमर का घेरा, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और संपूर्ण डाइट जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कौन सी जांच करानी चाहिए?
हर व्यक्ति को बिना वजह पोषक तत्वों की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। अगर लगातार थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी या अन्य लक्षण बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। चिकित्सक जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, लिवर फंक्शन या किसी विशेष विटामिन और मिनरल की जांच की सलाह दे सकते हैं। रिपोर्ट के आधार पर ही सप्लीमेंट या उपचार लेना चाहिए।

पेट भर खाना और शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना एक ही बात नहीं है। वजन ज्यादा होने के बावजूद किसी व्यक्ति में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, खासकर तब जब डाइट में कैलोरी अधिक लेकिन पोषण देने वाले खाद्य पदार्थ कम हों। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए केवल वजन या BMI पर ध्यान देने के बजाय संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच को भी महत्व देना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी व्यक्ति में विटामिन, मिनरल या अन्य पोषक तत्वों की कमी की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं की जा सकती। सप्लीमेंट या डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें।