कोंडागांव। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत कोंडागांव जिले में किए जा रहे सोलर सिस्टम इंस्टॉलेशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने केशकाल, फरसगांव और माकड़ी विकासखंडों में योजना के तहत हो रहे कार्यों में कथित अनियमितताओं और तकनीकी सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

पूर्व विधायक का कहना है कि योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर बिजली की जरूरतों को पूरा करना और उपभोक्ताओं पर बिजली खर्च का बोझ कम करना है। ऐसे में योजना के नाम पर यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या गलत तरीके से सिस्टम लगाए जाने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो इससे योजना की पारदर्शिता और लाभार्थियों की सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

बैटरी सिस्टम को लेकर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
कृष्ण कुमार ध्रुव ने योजना के तहत लगाए जा रहे सोलर सिस्टम में बैटरी बैंक के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि योजना में मिलने वाली केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान मुख्य रूप से ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए है और बैटरी आधारित व्यवस्था को उसी तरह सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता।

पूर्व विधायक का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ स्थानों पर वेंडरों द्वारा ग्रामीणों के घरों में बैटरी बैंक लगाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ मामलों में ग्रामीणों को योजना की वास्तविक शर्तों की पूरी जानकारी दिए बिना अतिरिक्त उपकरणों के संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बैटरी लगाने की वास्तविक स्थिति, संबंधित सिस्टम की तकनीकी संरचना और भुगतान या सब्सिडी से उसका संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

'ग्रामीणों को योजना के नाम पर गुमराह किया जा रहा'
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में वेंडरों की ओर से पहले घरों में बैटरी या अन्य उपकरण पहुंचाए जाने और बाद में कागजी प्रक्रिया पूरी करने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उन्हें योजना के तहत कौन-सा सिस्टम मिल रहा है, उसमें कौन-कौन से उपकरण शामिल हैं और किस उपकरण पर सरकारी सहायता उपलब्ध है ? उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी जांचने की मांग की है कि लाभार्थियों से किसी अतिरिक्त उपकरण या सेवा के नाम पर पैसा तो नहीं लिया गया।

विद्युत विभाग की निगरानी पर भी सवाल
कृष्ण कुमार ध्रुव ने योजना के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे स्थानीय तंत्र पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में घरों में सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, इसलिए प्रत्येक इंस्टॉलेशन की तकनीकी गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि नियमों के विपरीत सिस्टम लगाए गए हैं तो यह केवल वेंडर की जिम्मेदारी का विषय नहीं हो सकता। विभागीय स्तर पर निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, विद्युत विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों की किसी तरह की मिलीभगत का आरोप केवल पूर्व विधायक द्वारा लगाया गया है। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

बैटरियों की सुरक्षा को लेकर चिंता
पूर्व विधायक ने बैटरी लगाने के तरीके को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी स्थान पर बैटरी सिस्टम स्थापित किया जा रहा है तो वहां पर्याप्त वेंटिलेशन, उचित वायरिंग, सुरक्षा उपकरण और निर्माता द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन होना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बैटरी लगाने से शॉर्ट सर्किट, ओवरहीटिंग या अन्य तकनीकी दुर्घटनाओं का खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञ स्तर की तकनीकी जांच से ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि लगाए गए सिस्टम में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ है या नहीं। इसलिए उन्होंने मौके पर जाकर निरीक्षण कराने की मांग की है।

तीन विकासखंडों में जांच की मांग
पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने विशेष रूप से केशकाल, फरसगांव और माकड़ी विकासखंडों में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लगाए गए सोलर सिस्टम की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। अधिकारियों को लाभार्थियों के घरों तक पहुंचकर यह देखना चाहिए कि मौके पर वास्तव में किस प्रकार का सोलर सिस्टम लगाया गया है और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी से उसका मिलान होता है या नहीं ?

इन बिंदुओं पर हो जांच
पूर्व विधायक ने उच्चस्तरीय जांच के दौरान कई बिंदुओं को शामिल करने की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से 

  • लाभार्थियों के घरों में लगाए गए सोलर सिस्टम की तकनीकी जांच।
  • बैटरी बैंक लगाए जाने की वास्तविक स्थिति।
  • वेंडरों द्वारा किए गए इंस्टॉलेशन की जांच।
  • लाभार्थियों से लिए गए भुगतान और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन।
  • सब्सिडी के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की जांच।
  • सिस्टम की क्षमता और स्वीकृत क्षमता का मिलान।
  • वायरिंग और अन्य विद्युत उपकरणों की सुरक्षा जांच।
  • बैटरी लगाने की स्थिति में वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों की जांच।
  • वेंडरों और विभागीय सत्यापन प्रक्रिया की जांच।

दोष मिलने पर कार्रवाई की मांग
कृष्ण कुमार ध्रुव ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में वास्तविक स्थिति सामने लाना होना चाहिए। यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन, गलत दस्तावेज, लाभार्थियों से अनुचित वसूली या तकनीकी मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना सीधे आम उपभोक्ताओं और ग्रामीण परिवारों से जुड़ी है। ऐसे में योजना में पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और लाभार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।

जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक तस्वीर
फिलहाल, कोंडागांव जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लगाए गए सिस्टम को लेकर पूर्व विधायक ने आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है। अब यदि विद्युत विभाग की ओर से मौके पर तकनीकी और दस्तावेजी जांच कराई जाती है, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम हुआ है या कहीं नियमों से हटकर गतिविधियां हुई हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।