
रायपुर। छत्तीसगढ़ में गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राजधानी रायपुर के प्रेस क्लब में आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वर्तमान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा आमने-सामने आए। दोनों नेताओं के बीच पीएम आवास योजना के तहत स्वीकृति, निर्माण, पोर्टल और सरकारों के कार्यकाल में हुए काम के आंकड़ों को लेकर तीखी बहस हुई। चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के दावों और आंकड़ों पर सवाल उठाए।
बहस के दौरान भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में आवास निर्माण को लेकर कहा कि अगर उनकी सरकार के समय पर्याप्त आवास नहीं बने, तो जनता ने चुनाव में उन्हें इसकी सजा दी। वहीं विजय शर्मा ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुए आवास निर्माण के आंकड़े गिनाते हुए पिछली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बघेल के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को स्वीकृति, स्वीकार्यता और वास्तविक निर्माण के बीच का अंतर समझना चाहिए। जवाब में बघेल ने वर्तमान सरकार पर आंकड़ों को लेकर भ्रम पैदा करने और जनता के सामने गलत तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया।
विजय शर्मा ने गिनाए PM आवास के आंकड़े
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने चर्चा के दौरान साय सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि राज्य में अब तक 11 लाख 75 हजार पीएम आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। मंत्री के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पूरे देश में सबसे ज्यादा पीएम आवास छत्तीसगढ़ में बनाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि आवास निर्माण के लिए सरकार की ओर से करीब 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा राज्य में 3 लाख 65 हजार नए आवासों के निर्माण की स्वीकृति मिलने की बात भी उन्होंने कही।
विजय शर्मा ने इन आंकड़ों को सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में मौजूदा सरकार तेजी से काम कर रही है। उनके मुताबिक केवल स्वीकृति देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक निर्माण पूरा होना योजना की सफलता का अहम पैमाना है।
पिछली कांग्रेस सरकार पर विजय शर्मा का हमला
बहस के दौरान विजय शर्मा ने वर्ष 2020-21 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय पीएम आवास के निर्माण और स्वीकृति को लेकर कोरोना महामारी का हवाला दिया जाता रहा है। शर्मा का तर्क था कि महामारी के दौरान भी देश के कई अन्य राज्यों में आवास योजना के तहत स्वीकृति और काम हुआ था।
उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान गरीब परिवारों को पीएम आवास का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाया। शर्मा ने कहा कि आवास जैसे बुनियादी मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय यह देखना जरूरी है कि पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं। उन्होंने इसी संदर्भ में पिछली सरकार की नीतियों और उस समय की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
पोर्टल बंद होने के मुद्दे पर भी भिड़े दोनों नेता
बहस का एक बड़ा मुद्दा PM Awas Portal भी रहा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पीएम आवास का पोर्टल बंद कर दिया गया था। उनका कहना था कि पोर्टल बंद होने की वजह से राज्य में योजना की प्रक्रिया प्रभावित हुई और पात्र परिवारों के लिए आवास स्वीकृति एवं निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ पाया।
इसके जवाब में विजय शर्मा ने पोर्टल बंद होने के दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पीएम आवास से संबंधित प्रक्रिया को दूसरी आवास योजनाओं के साथ मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। शर्मा ने विशेष रूप से स्वीकृति, स्वीकार्यता और निर्माण के आंकड़ों का अंतर समझाने की कोशिश की।
मंत्री के मुताबिक अलग-अलग चरणों के आंकड़ों को जोड़कर एक ही संख्या के रूप में पेश करने से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने बघेल के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम आवास योजना में किसी मकान की स्वीकृति और उसके वास्तविक निर्माण को एक ही चीज नहीं माना जा सकता।
'मुख्यमंत्री न्याय आवास योजना' को लेकर भी आया विवाद
विजय शर्मा ने चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार के समय संचालित मुख्यमंत्री न्याय आवास योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य सरकार की अपनी आवास योजना के पोर्टल पर राशि और प्रक्रिया चल रही थी, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रक्रिया अलग थी।
यही अंतर बहस का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गया। शर्मा का कहना था कि दोनों योजनाओं के आंकड़ों को आपस में मिलाकर देखने के बजाय प्रत्येक योजना के तहत स्वीकृत और निर्मित मकानों की अलग-अलग स्थिति सामने रखी जानी चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर आंकड़ों को अपने पक्ष में प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को वास्तविक संख्या बताई जानी चाहिए।
भूपेश बघेल ने सरकार के आंकड़ों पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साय सरकार की ओर से बताए जा रहे पीएम आवास के आंकड़ों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत किए जाने और बनाए जाने के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितने मकान स्वीकृत हुए, कितने हितग्राहियों ने स्वीकृति स्वीकार की और कितने मकानों का वास्तविक निर्माण पूरा हुआ।
बघेल ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए फिर कहा कि उस समय केंद्र सरकार की ओर से पीएम आवास का पोर्टल बंद किए जाने के कारण योजना प्रभावित हुई थी। उनके मुताबिक राज्य सरकार पात्र लोगों के लिए आवास बनाना चाहती थी, लेकिन केंद्र स्तर पर पोर्टल से जुड़ी समस्या के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
46 लाख, 18 लाख और 10 लाख के आंकड़ों पर बघेल का सवाल
भूपेश बघेल ने पीएम आवास योजना को लेकर अलग-अलग स्तरों से सामने आने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक तरफ 46 लाख मकान बनाए जाने का दावा सामने आता है, वहीं राज्य सरकार की ओर से 18 लाख आवास स्वीकृत किए जाने की बात कही जाती है।
बघेल ने केंद्रीय स्तर से सामने आए करीब 10 लाख मकानों की स्वीकृति के आंकड़े का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि आखिर वास्तविक संख्या क्या है ? उन्होंने इसी अंतर को लेकर सरकार पर तंज कसते हुए कहा—'चीत भी मेरा, पट भी मेरा।' उनका कहना था कि जनता के सामने आंकड़ों की पूरी तस्वीर रखी जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अलग-अलग संख्या किस चरण या किस योजना से संबंधित है।
'झूठ परोसना बंद कीजिए'- बघेल
बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच जुबानी टकराव भी देखने को मिला। भूपेश बघेल ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'झूठ परोसना बंद कीजिए।' उन्होंने फिर दोहराया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में केंद्र की ओर से पोर्टल बंद होने की वजह से पीएम आवास योजना प्रभावित हुई थी। बघेल ने कहा कि मौजूदा सरकार को केवल अपने कार्यकाल के आंकड़े बताने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि पूर्व सरकार के समय आवास योजना की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में प्रभावित हुई थी।
विजय शर्मा का पलटवार- 'झूठ मत बोलिए'
भूपेश बघेल के आरोपों पर विजय शर्मा भी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि बघेल जी सब कुछ समझ रहे हैं, लेकिन जनता को समझाने की कोशिश कुछ और तरीके से की जा रही है। बहस के दौरान शर्मा ने कई बार बघेल के दावों पर आपत्ति जताते हुए 'झूठ मत बोलिए' जैसी टिप्पणी की।
शर्मा का कहना था कि आवास योजना से जुड़े आंकड़ों को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय रिकॉर्ड और प्रक्रिया के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वीकृति और निर्माण के बीच के चरणों को समझे बिना केवल कुल संख्या बताना सही तस्वीर पेश नहीं करता।
'आवास नहीं बनाए तो जनता ने सजा दी'- बघेल
इस पूरी बहस के बीच भूपेश बघेल का एक बयान खास तौर पर चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार के कार्यकाल में पर्याप्त आवास नहीं बने, तो जनता ने चुनाव में उन्हें इसकी सजा दे दी। बघेल का यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया कि उन्होंने पीएम आवास को लेकर अपनी सरकार के प्रदर्शन और चुनावी परिणाम के बीच संबंध को स्वीकार किया। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में आवास योजना के प्रभावित होने के पीछे केंद्र सरकार के पोर्टल से जुड़ी समस्या प्रमुख कारण थी।
असली विवाद आंकड़ों का नहीं, 'कितने मकान बने' का है
दोनों नेताओं की बहस को अगर सरल भाषा में समझें तो विवाद केवल यह नहीं है कि किस सरकार ने कितने मकानों की घोषणा की। असली सवाल यह है कि कितने मकान स्वीकृत हुए, कितने हितग्राहियों ने स्वीकृति स्वीकार की, कितने मकानों का निर्माण शुरू हुआ और कितने मकान वास्तव में बनकर तैयार हुए।
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में इन सभी चरणों की संख्या अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी सरकार के प्रदर्शन का आकलन करते समय केवल स्वीकृत आवासों की संख्या या केवल निर्माण पूर्ण होने की संख्या को देखने के बजाय पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। यही अंतर आज रायपुर प्रेस क्लब में हुई बहस का सबसे अहम हिस्सा रहा।
गरीबों के आवास पर सियासत जारी
पीएम आवास योजना छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पक्का मकान सीधे तौर पर जीवन की बुनियादी जरूरत से जुड़ा विषय है। ऐसे में योजना की प्रगति के आंकड़े राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
एक ओर साय सरकार अपने कार्यकाल में तेजी से हुए आवास निर्माण को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस पूर्ववर्ती कार्यकाल में केंद्र से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं और पोर्टल बंद होने को योजना की धीमी प्रगति का कारण बता रही है।
रायपुर प्रेस क्लब में हुई यह बहस इसी राजनीतिक टकराव का नया अध्याय रही, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने आंकड़ों और तर्कों के आधार पर एक-दूसरे को घेरने की कोशिश की। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में सरकार और विपक्ष इन आंकड़ों को किस तरह जनता के सामने रखते हैं और पात्र हितग्राहियों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाने के मुद्दे पर सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।