लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की EMI वसूली को लेकर कथित प्रताड़ना का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव के रहने वाले नेवल के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोबाइल की किश्त का भुगतान न होने पर कुछ लोगों ने युवक को जबरन अपने साथ ले जाकर बंधक बना लिया। परिवार का दावा है कि उसे ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और इसके बाद कई दिनों तक एक मकान में कैद रखकर उससे मजदूरी कराई गई।

मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक को छोड़ने के बदले उनसे मोबाइल की किश्त के नाम पर पैसे मांगे गए और भुगतान नहीं करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। परिवार के मुताबिक, स्थानीय थाने में शिकायत के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित की बुजुर्ग मां डीसीपी दक्षिणी के पास पहुंचीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी ने मुकदमा दर्ज करने, आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं।

₹21,500 के मोबाइल से शुरू हुआ विवाद
परिवार के मुताबिक, करीब एक साल पहले नेवल ने निगोहां कस्बे की एक मोबाइल दुकान से लगभग 21,500 कीमत का Samsung मोबाइल फोन फाइनेंस पर खरीदा था। बताया गया कि फोन के लिए जीरो डाउन पेमेंट की व्यवस्था थी और हर महीने 2,799 की 12 किश्तें चुकानी थीं। परिजनों का कहना है कि शुरुआत में ही एक किश्त बकाया हो गई थी। इसके बाद दुकान से जुड़े लोग उनके घर पहुंचे और कथित तौर पर मोबाइल फोन अपने साथ ले गए। परिवार का दावा है कि फोन वापस ले लिए जाने के बावजूद कुछ समय बाद फिर से बकाया रकम को लेकर दबाव बनाया जाने लगा। यहीं से शुरू हुआ किश्त का विवाद बाद में कथित तौर पर युवक को बंधक बनाए जाने तक पहुंच गया।

8 सितंबर को युवक को घर से ले जाने का आरोप
पीड़ित के भाई राजकुमार और मां जदूराई के अनुसार, 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से उनके गांव पहुंचे। परिवार का आरोप है कि दोनों ने नेवल को अपने साथ चलने के लिए कहा और उसे जबरन अपने साथ ले गए। परिजनों को शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि युवक को कहां ले जाया गया है। परिवार के मुताबिक, बाद में उन्हें पता चला कि नेवल को एक ब्लड बैंक ले जाया गया था।

'EMI के बदले खून' निकलवाने का आरोप
परिवार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि नेवल को ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। परिजनों का दावा है कि यह सब उसकी इच्छा के खिलाफ किया गया और इसे मोबाइल की किश्त के विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल EMI वसूली या मोबाइल फाइनेंस विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें जबरन ले जाने, अवैध तरीके से रोकने, धमकी देने और अन्य गंभीर अपराधों के पहलुओं की जांच की जरूरत होगी। हालांकि, युवक से रक्त किस परिस्थिति में लिया गया, ब्लड बैंक में उसकी सहमति किस तरह दर्ज हुई और रक्त लेने की पूरी प्रक्रिया क्या थी, इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और संबंधित संस्थान के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

ब्लड बैंक के बाद मकान में बंधक बनाने का दावा
परिजनों के अनुसार, ब्लड बैंक ले जाने के बाद नेवल को सदर इलाके के एक मकान में रखा गया। परिवार का आरोप है कि युवक को कई दिनों तक वहां से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उससे जबरन मजदूरी भी कराई गई। इस दौरान परिवार उसकी स्थिति को लेकर परेशान रहा। आरोप है कि युवक से संपर्क सीमित रखा गया और परिजनों को भी उसकी सही स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। मामले का यह पहलू पुलिस जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यदि युवक को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी स्थान पर रखा गया था तो पुलिस को उसके बयान, उस मकान की पहचान, वहां मौजूद लोगों और CCTV या अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करनी होगी।

भाई को फोन कर मांगे 2,799, जान से मारने की धमकी का आरोप
पीड़ित के भाई राजकुमार का आरोप है कि इस दौरान आरोपियों की ओर से उन्हें फोन किया गया। कथित तौर पर मोबाइल की किश्त के नाम पर 2,799 की मांग की गई। परिवार का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर नेवल को जान से मारने की धमकी दी गई। उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया कि अगर रकम नहीं दी गई तो युवक की हत्या कर उसे गोमती नदी में फेंक दिया जाएगा। इन धमकियों की सत्यता और फोन कॉल की वास्तविकता की जांच पुलिस के लिए अहम होगी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, ऑडियो रिकॉर्डिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पांच दिन बाद रैपिडो कैब से थाने भेजने का आरोप
पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि उन्होंने निगोहां थाने में शिकायत की थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद करीब पांचवें दिन नेवल को Rapido कैब के जरिए थाने भेजा गया। परिवार का आरोप है कि कैब का किराया भी उनसे ही भरवाया गया। जब बदहवास हालत में नेवल थाने पहुंचा तो परिजनों ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार का दावा है कि उन्हें कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से उन्हें ही फंसाने की धमकी दी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की भूमिका की जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी और उसमें किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं।

बुजुर्ग मां पहुंचीं DCP के पास
स्थानीय थाने से अपेक्षित मदद नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित की बुजुर्ग मां जदूराई ने उच्च पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई। वह DCP दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचीं और पूरे मामले की जानकारी दी। DCP ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी के प्रयास करने और स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। अब मामले की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि युवक को किन लोगों ने अपने साथ लिया, उसे कहां-कहां ले जाया गया, रक्त कहां और किन परिस्थितियों में लिया गया तथा उसे कथित तौर पर कितने समय तक बंधक बनाकर रखा गया।

पुलिस जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा

  • नेवल को घर से कौन-कौन लोग लेकर गए?
  • क्या उसे उसकी इच्छा के खिलाफ कहीं ले जाया गया?
  • ब्लड बैंक में रक्त लेने की प्रक्रिया कैसे हुई?
  • क्या उसके पास रक्तदान की सहमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड था?
  • उसे जिस मकान में रखने का आरोप है, वह किसका था?
  • वहां कितने समय तक युवक को रखा गया?
  • क्या उससे जबरन मजदूरी कराई गई?
  • ₹2,799 मांगने वाले फोन कॉल किस नंबर से किए गए?
  • स्थानीय थाने में शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई?
  • क्या पुलिसकर्मियों की ओर से किसी तरह की लापरवाही हुई?

इन सभी बिंदुओं की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में घटनाक्रम क्या था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे?

EMI वसूली के नाम पर ऐसी कार्रवाई पर बड़ा सवाल
मोबाइल या किसी अन्य सामान की EMI का भुगतान न होना एक वित्तीय विवाद हो सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति को कथित तौर पर जबरन ले जाना, बंधक बनाना, धमकी देना या उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक प्रक्रिया कराना बेहद गंभीर आरोप हैं। ऐसे मामलों में वसूली की वैध प्रक्रिया और कथित दबाव या हिंसा के बीच अंतर करना जरूरी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आरोपी पक्ष का बयान और ब्लड बैंक सहित अन्य संबंधित संस्थानों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में आरोप साबित होना बाकी है। पुलिस जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।