
बस्तर: बस्तर में नक्सल नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ अब उनके छिपाए गए खजाने भी सामने आने लगे हैं। हालिया कार्रवाई में पुलिस को 8.2 किलो सोना और करोड़ों रुपये नकद बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह सोना नोटबंदी के दौरान नकदी को बचाने के लिए खरीदा गया था और बाद में जंगलों में छिपा दिया गया।
20 दिन में करोड़ों का खजाना बरामद
पिछले कुछ हफ्तों में सुरक्षा बलों को जमीन के नीचे दबे बड़े आर्थिक नेटवर्क के सबूत मिले हैं। करीब 8 किलो से ज्यादा सोना और लगभग 6.5 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं। बाजार मूल्य के हिसाब से सिर्फ सोने की कीमत ही करीब 14 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह बरामदगी बताती है कि नक्सली संगठनों ने वर्षों तक बड़े पैमाने पर फंड इकट्ठा किया था।
नोटबंदी में कैश बना ‘सोना’
जांच में सामने आया कि 2016 की नोटबंदी नक्सलियों के लिए बड़ा झटका साबित हुई थी। उस समय उनके पास बड़ी मात्रा में कैश मौजूद था, जिसमें अधिकतर पुराने नोट शामिल थे। ऐसे में उन्होंने नुकसान से बचने के लिए करीब 20 करोड़ रुपये नकद को सोने में बदल दिया। इस काम के लिए बाहरी राज्यों के ज्वेलर्स की मदद ली गई और कमीशन देकर सोने की ईंटें तैयार करवाई गईं।
24 कैरेट सोना, जंगलों में छिपाया गया
खरीदे गए सोने को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग जगहों पर जमीन के नीचे दबा दिया गया। इंद्रावती नदी के किनारे और पहाड़ी इलाकों को इसके लिए सुरक्षित ठिकाना माना गया। योजना यह थी कि जरूरत पड़ने पर इस सोने को फिर नकदी में बदला जाएगा।
राजदारों की मौत से उलझी गुत्थी
इस पूरे नेटवर्क की जानकारी केवल कुछ शीर्ष नक्सली नेताओं को ही थी। लेकिन हाल की मुठभेड़ों में इन नेताओं के मारे जाने से सोने के छिपे ठिकानों का पूरा राज सामने नहीं आ पा रहा है। अब पुलिस आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों और मुखबिरों की मदद से एक-एक ठिकाने की जानकारी जुटा रही है।
हली बरामदगी से खुला रास्ता
मार्च महीने में पहली बार लगभग 1 किलो सोना बरामद हुआ था, जिसके बाद लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया। हाल ही में एक साथ 7 किलो से ज्यादा सोना मिलने से यह साफ हो गया कि अभी और भी खजाना जमीन के नीचे छिपा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अब संभावित ठिकानों पर लगातार सर्च अभियान चला रही हैं।
नकदी भी पॉलीथिन में दबाकर रखी
सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये कैश भी अलग-अलग जगहों पर दबाकर रखा गया था। नोटों को बंडल बनाकर पॉलीथिन में पैक किया गया ताकि लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। यह तरीका दिखाता है कि नक्सली संगठनों ने अपने फंड को सुरक्षित रखने के लिए योजनाबद्ध तरीके अपनाए थे।
नक्सल नेटवर्क कमजोर, सरेंडर बढ़े
इधर, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में भी नक्सलियों के सरेंडर का सिलसिला तेज हुआ है। हाल ही में 9 सीनियर नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया।लगातार हो रही कार्रवाइयों और सरेंडर के चलते नक्सलवाद अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
अभी और खुल सकते हैं राज
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक जो बरामदगी हुई है, वह कुल छिपे खजाने का केवल एक हिस्सा हो सकती है। आने वाले समय में और सोना और नकदी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यह मामला नक्सल फंडिंग के बड़े नेटवर्क को उजागर कर सकता है।




