काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नदियों के उफान और अचानक आई बाढ़ के बीच सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इन भयावह हालात के बीच त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूरों का नौ दिन बाद जिंदा बाहर निकलना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। जिस सुरंग को बाहर की दुनिया से कट चुकी ‘मौत की सुरंग’ माना जा रहा था, वहीं दोनों मजदूरों ने जिंदगी की जंग जीत ली।

नौ दिन तक सुरंग में फंसी रही जिंदगी
रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी के उफान के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में पानी और मलबा भर गया था। इस दौरान कई मजदूरों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई। बचाव दल लगातार सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था। कई दिनों की मशक्कत के बाद नेपाल सेना के जवानों ने सुरंग के भीतर फंसे दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। दोनों की हालत ऐसी थी कि उनके परिजनों को भी उम्मीद कम होती जा रही थी, लेकिन रेस्क्यू टीम के लिए यह ऑपरेशन एक बड़ी सफलता साबित हुआ।Nepal survivor (1)

बाहर आते ही परिवार की आंखों में छलके आंसू
रेस्क्यू किए गए मजदूरों में कबीर महर्जन भी शामिल हैं। उनके भाई अमीर महर्जन ने इस खबर के बाद राहत जताते हुए कहा कि उनके लिए यह बेहद भावुक पल है और लंबे इंतजार के बाद मन का बोझ हल्का हुआ है। कबीर की पत्नी के मुताबिक, सुरंग से बाहर निकाले जाने के समय उनके पति होश में थे। इसके बाद उन्हें इलाज और चिकित्सकीय निगरानी के लिए काठमांडू के सैन्य अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई।Nepal survivor (3)

आखिर 9 दिन तक कैसे जिंदा रहे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना पर्याप्त भोजन और पानी के दोनों मजदूर इतने लंबे समय तक सुरंग के भीतर कैसे जीवित रहे। बचाव विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी एक संभावित वजह सुरंग के भीतर मौजूद एयर पॉकेट्स हो सकती हैं। सुरंगों के निर्माण के दौरान कुछ स्थानों पर हवा के लिए खाली जगहें रह जाती हैं। बाढ़ का पानी पूरी सुरंग में भर जाने के बावजूद यदि ऐसी कोई जगह सुरक्षित रह गई हो, तो वहां फंसे लोगों को कुछ समय तक सांस लेने के लिए पर्याप्त हवा मिल सकती है। हालांकि, दोनों मजदूरों के नौ दिनों तक जीवित रहने की वास्तविक परिस्थितियां उनकी चिकित्सकीय जांच और रेस्क्यू के बाद की जानकारी से ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी।Nepal survivor (4)

दो जिंदगियों ने बढ़ाई सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद
इन दो मजदूरों के सुरक्षित मिलने के बाद राहत दलों की उम्मीद भी बढ़ गई है। अधिकारियों को आशंका है कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य सुरंगों में भी लोग फंसे हो सकते हैं। ऐसे में बचाव अभियान को और तेज किया जा रहा है। नेपाल में आई इस आपदा ने कई परिवारों को अपनों से दूर कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों की तलाश अब भी जारी है। ऐसे में नौ दिन बाद सुरंग से दो मजदूरों का जिंदा निकलना सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिनके अपने अभी भी लापता हैं।Nepal survivor (2)

रेस्क्यू टीम के सामने अब भी बड़ी चुनौती
बाढ़ का पानी, मलबा और दुर्गम पहाड़ी इलाका राहत एवं बचाव दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद सेना और स्थानीय बचाव दल सुरंगों तथा प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं। दो मजदूरों की जिंदगी बचने की इस घटना ने यह उम्मीद जरूर जगाई है कि मलबे और सुरंगों के बीच फंसे कुछ और लोगों तक भी बचाव दल पहुंच सकता है। अब हर गुजरते घंटे के साथ रेस्क्यू टीम की नजर उन जगहों पर है, जहां से किसी और जिंदगी के लौटने की उम्मीद बाकी है।