
बिलासपुर : बालोद में सरकारी उचित मूल्य दुकानों की जांच के बाद छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के सहायक प्रमोद कुमार शर्मा को निलंबित करना कलेक्टर को भारी पड़ गया। निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फिलहाल कलेक्टर के 17 अगस्त 2026 के निलंबन आदेश के प्रभाव और अमल पर रोक लगा दी है। जस्टिस बी डी गुरु की अदालत ने मामले में राज्य और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।
कहां से आया कलेक्टर के पास निलंबन का अधिकार?
सुनवाई के दौरान मामला सिर्फ राशन दुकानों में हुई कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा विवाद कलेक्टर के निलंबन अधिकार पर आकर टिक गया। प्रमोद कुमार शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारी हैं। इसके बावजूद उनका निलंबन कलेक्टर की ओर से छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमों के तहत किया गया। याचिकाकर्ता का आरोप हैं कि जब कलेक्टर न तो प्रमोद के नियुक्तिकर्ता हैं और न ही निगम के अनुशासनिक प्राधिकारी, तो उन्हें निलंबित करने का अधिकार किस प्रावधान के तहत मिला?
जांच समिति बनी, रिपोर्ट आते ही सीधे निलंबन
बालोद कलेक्टर ने 15 जुलाई 2026 को शहरी क्षेत्र की सरकारी उचित मूल्य दुकानों के कामकाज की जांच के लिए समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताओं के लिए प्रमोद कुमार शर्मा को जिम्मेदार बताया गया। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर की खाद्य शाखा ने 17 अगस्त 2026 को प्रमोद को निलंबित कर दिया। इसके बाद प्रमोद ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए निलंबन आदेश को चुनौती दी।
कलेक्टर को पीडीएस में निगरानी और कार्रवाई का अधिकार: सरकार
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि कलेक्टर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियंत्रण आदेश के तहत पर्यवेक्षण अधिकारी हैं। उन्हें राशन के उठाव, भंडारण, परिवहन और वितरण की निगरानी के साथ तलाशी और जब्ती जैसी शक्तियां भी प्राप्त हैं। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि इन्हीं अधिकारों के तहत जांच समिति गठित की गई थी और जांच रिपोर्ट में प्रमोद को जिम्मेदार पाए जाने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन की जानकारी निगम के प्रबंध संचालक को भी दी गई थी और उन्होंने कार्रवाई को मंजूरी दी है।
किस नियम के तहद निलंबन का अधिकार
सुनवाई के दौरान निगम ने यह स्वीकार किया कि प्रमोद कुमार शर्मा निगम के कर्मचारी हैं। हालांकि कलेक्टर को निगम के कर्मचारी को निलंबित करने का अधिकार आखिर किस वैधानिक प्रावधान से प्राप्त है, इसका स्पष्ट जवाब निगम नहीं दे सका। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि राज्यपाल की ओर से ऐसा कोई सामान्य अथवा विशेष आदेश भी सामने नहीं रखा गया है, जिसके आधार पर कलेक्टर को निगम कर्मचारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने का अधिकार मिलता हो।
हाई कोर्ट ने निलंबन पर लगाई रोक
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की ओर से लगाया गया आरोप गंभीर है, निगम के कर्मचारी को निलंबित करने के लिए कलेक्टर के अधिकार का वैधानिक आधार क्या है। राज्य और निगम की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया जा सका, जिससे कलेक्टर के पास निगम कर्मचारी को निलंबित करने का अधिकार साबित हो। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 17 अगस्त 2026 के निलंबन आदेश के प्रभाव और अमल को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। अब इस मामले में राज्य और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करना होगा।
अब 2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रमोद कुमार शर्मा के खिलाफ जारी निलंबन आदेश पर रोक है। हालांकि, राशन दुकानों की जांच में सामने आई अनियमितताओं और उसमें उनकी कथित जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।