बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम और फायर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है । चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान 124 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित नई फायर ब्रिगेड गाड़ियों की खरीदी प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाए ।

जून में टेंडर पूरा होने की दी गई थी जानकारी

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने पहले हाई कोर्ट को बताया था कि प्रदेश में फायर ब्रिगेड व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करीब 124 करोड़ रुपये की लागत से नई दमकल गाड़ियां खरीदी जाएंगी और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है । उस समय शासन ने जल्द ही वाहनों के उपलब्ध होने की बात कही थी । हालांकि, बुधवार को सुनवाई से पहले पेश किए गए शपथ पत्र में राज्य सरकार ने बताया कि खरीदी की प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है । टेंडर में सबसे कम निविदा देने वाली संस्था के साथ अभी तक समझौता नहीं हो पाया है । साथ ही निर्धारित समय सीमा बढ़ाने की अनुमति भी लंबित है ।

डीजीपी ने गृह सचिव को लिखा था पत्र

शासन की ओर से बताया गया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने जून में गृह सचिव को पत्र लिखकर टेंडर की तय समय सीमा बढ़ाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक इस पर निर्णय नहीं हो पाया है । सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि प्रक्रिया अंतिम चरण में है और वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद है ।

न्याय मित्र ने बताया दो माह में पांच स्मरण पत्र

न्याय मित्र अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है । पिछले दो महीनों में संबंधित विभागों को पांच स्मरण पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक न तो समय सीमा बढ़ाई गई और न ही आवश्यक अनुमति मिल पाई है । उन्होंने कहा कि स्मरण पत्रों में हाई कोर्ट द्वारा मामले की लगातार निगरानी और पारित आदेशों का भी उल्लेख किया गया है । इसके बावजूद प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति में देरी होना दुर्भाग्यपूर्ण है ।

हाई कोर्ट ने पूछाअनुमतियों में इतनी देरी क्यों?

न्याय मित्र की जानकारी के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से कड़ा सवाल किया कि जब नई फायर ब्रिगेड गाड़ियों की खरीदी का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तो फिर आगे की कार्रवाई क्यों लंबित है । कोर्ट ने कहा कि अनुमति देने की प्रक्रिया में इतना समय नहीं लगना चाहिए । डिवीजन बेंच ने राज्य के वित्त सचिव और गृह सचिव से शपथ पत्र पेश कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि समय सीमा बढ़ाने और अन्य आवश्यक अनुमतियां देने में देरी क्यों हो रही है ।

31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने राज्य शासन को अगली सुनवाई तक इस संबंध में विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं । मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी । अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार की ओर से लंबित अनुमतियों और 124 करोड़ रुपये की फायर ब्रिगेड खरीदी को लेकर क्या जवाब पेश किया जाता है ।