
दंतेवाड़ा। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस ने जाली दस्तावेजों के जरिए जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र बनवाकर CISF में भर्ती होने के आरोपी सत्यम दीक्षित को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी आरोपी को राजस्थान के देवली से पकड़ा गया, जहां वह नौकरी कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान दस्तावेजों को लेकर गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई। अब पुलिस इस कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का मामला, प्रमाण पत्रों के सत्यापन में पकड़ाई गड़बड़ी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिटी कोतवाली दंतेवाड़ा में मामले की जांच पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह के निर्देश पर तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र खूंटे और एसडीओपी आकांक्षा ठाकुर के मार्गदर्शन में की जा रही थी। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दंतेवाड़ा जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल किया था। आरोप है कि इन्हीं प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल उसने CISF में भर्ती के लिए किया।
मामले में संदेह सामने आने के बाद पुलिस ने राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया। इस प्रक्रिया में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर संदिग्ध तथ्य सामने आए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और उसके राजस्थान के देवली में मौजूद होने की जानकारी मिलने पर टीम रवाना की गई।
देवली में दबिश देकर सत्यम दीक्षित को किया गिरफ्तार
दंतेवाड़ा पुलिस की टीम ने राजस्थान के देवली पहुंचकर सत्यम दीक्षित को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी वहीं CISF में कार्यरत था। गिरफ्तारी के बाद उसे विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने में और कौन-कौन शामिल? जांच जारी
पुलिस अब इस मामले में कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, प्रमाण पत्र हासिल करने और उनके इस्तेमाल में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। दंतेवाड़ा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी या किसी शासकीय लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल न करें। ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।