रायपुर। राजधानी में भले ही पुलिस कमिश्नरी बनने के बाद से रोजाना गुंडे-बदमाशों की परेड कराई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। शहर में चाकूबाजी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। पुलिस की लगातार सख्ती के बावजूद बदमाश बेखौफ हैं। छोटे-छोटे विवादों और पुरानी रंजिश में लोगों पर सीधे जानलेवा हमले हो रहे हैं। पुलिस का खौफ गुंडे-बदमाशों में बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। रविवार और सोमवार देर रात को ही शहर में तीन अलग-अलग जगहों पर चाकूबाजी की वारदातें सामने आईं, जिसने रोज हो रही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन थाना क्षेत्रों में गंभीर घटनाएं

राजधानी के फाफाडीह, आजाद चौक और सिविल लाइन थाना क्षेत्रों में बीती रात बदमाशों ने जमकर आतंक मचाया। इन घटनाओं में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और सभी का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है।

 

 फाफाडीह: यहां मौदहापारा में रहने वाले स्क्रैप कारोबारी हनीफ खान को पुरानी रंजिश का शिकार होना पड़ा। अजहर खान और फज्जू ने मिलकर पहले हनीफ के साथ जमकर मारपीट की और फिर उस पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया।

 

आजाद चौक:

शिव नगर इलाके में एक छोटे से विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। सिर्फ बाइक तोड़ने के मामूली शक को लेकर रवि वर्मा ने हेमंत यादव पर खतरनाक हंसिए से हमला कर दिया।

 

सिविल लाइन: पंडरीतराई तालाब के पास यश निर्मलकर अपने दोस्त का इंतजार कर रहा था। तभी कृष और कालू वहां पहुंचे, उन्होंने पहले यश के साथ मारपीट शुरू की और फिर चाकू मारकर उसे घायल कर दिया।

पुलिस ने इन तीनों मामलों में अपराध दर्ज कर लिया है और अब आरोपियों की तलाश कर रही है। आपको बता दें कि इससे ठीक एक दिन पहले कोतवाली थाना क्षेत्र में भी ऐसी ही चाकूबाजी की घटना हुई थी।

कार्रवाई बहुत, फिर भी हथियारों तक आसान पहुंच

पुलिस चौक-चौराहों पर अड्डेबाजी करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। आउटर की कॉलोनियों में लगातार छापेमारी की जा रही है। रोज आर्म्स एक्ट और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के तहत कई आरोपियों को पकड़कर जेल भी भेजा जा रहा है। पुलिस ने ऑनलाइन चाकू की डिलीवरी पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है। इन तमाम कोशिशों के बावजूद शहर में खुलेआम चाकू की बिक्री अब भी धड़ल्ले से जारी है। धारदार हथियारों तक गुंडे-बदमाशों की यह आसान पहुंच ही पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

नाबालिगों की कमर में चाकू, डरा रहे आंकड़े

शहर का माहौल ऐसा हो गया है कि अब 13-14 साल के नाबालिग बच्चे भी अपनी कमर में चाकू लगाकर बेखौफ घूमते नजर आ रहे हैं। रायपुर कमिश्नरी और ग्रामीण क्षेत्रों के आंकड़े डराने वाले हैं। इलाके में अब तक 65 से अधिक चाकूबाजी की घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं, हत्या की 25 से ज्यादा वारदातें सामने आई हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से अधिकांश मामलों में जान लेने के लिए चाकू का ही इस्तेमाल किया गया है। यह साफ दिखाता है कि पुलिस की तमाम सख्ती और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद भी शहर में धारदार हथियारों का खौफ थमने का नाम नहीं ले रहा है।