
खैरागढ़ : राज्योत्सव समारोह की कवरेज के दौरान वरिष्ठ पत्रकार किशोर सोनी के साथ कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ गया है। घटना से नाराज जिलेभर के पत्रकारों ने फतेह सिंह मैदान के मुख्य गेट पर करीब दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। पत्रकारों के कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने संबंधित CAF जवान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं, कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने धरना स्थल पर पहुंचकर पत्रकारों से चर्चा की और उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पत्रकार से मारपीट के बाद भड़का आक्रोश
जिला स्तरीय सरस मेले और राज्योत्सव समारोह की कवरेज के दौरान वरिष्ठ पत्रकार किशोर सोनी के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, पत्रकार किशोर सोनी कार्यक्रम की कवरेज के लिए फतेह सिंह मैदान पहुंचे थे। इसी दौरान बाइक को साइड करने की बात को लेकर पुलिसकर्मियों और उनके बीच विवाद हो गया।
आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने पत्रकार के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद जिले के पत्रकारों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद जिला भर के पत्रकार एकजुट होकर फतेह सिंह मैदान के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए।
पत्रकारों ने घटना को गंभीर बताते हुए मारपीट करने वाले CAF जवान को तत्काल निलंबित करने और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। करीब दो घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने संबंधित CAF जवान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
धरना स्थल पहुंचे कलेक्टर, पत्रकारों से की चर्चा
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान पत्रकारों ने केवल मारपीट की घटना ही नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित अपनी पुरानी मांगों और प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापनों पर भी कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया।
कलेक्टर ने पत्रकारों को उनकी समस्याओं के निराकरण और पूर्व में सौंपे गए ज्ञापनों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पत्रकार संघ ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह गौर ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्रकार संघ द्वारा स्थानीय समस्याओं और विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों को लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद उन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पत्रकार संघ द्वारा उठाई गई समस्याओं और ज्ञापनों पर ही प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई नहीं करता, तो आम नागरिकों की शिकायतों का निराकरण किस तरह होता होगा?
पत्रकारों की सुरक्षा और जवाबदेही पर फिर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पत्रकारों की सुरक्षा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पत्रकारों का कहना है कि समाचार संकलन और जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना उनका दायित्व है। ऐसे में कवरेज के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
फिलहाल संबंधित CAF जवान को निलंबित कर दिया गया है और मामले की प्राथमिक जांच जारी है। अब सभी की नजरें जांच के निष्कर्ष और दोषी के खिलाफ होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। साथ ही पत्रकार संघ की पुरानी मांगों पर प्रशासन कितना अमल करता है, यह भी देखने वाली बात होगी।