
रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सोमवार सुबह शहर के कई इलाकों में नगर निगम के नलों से पीला और मटमैला पानी आने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुढ़ियारी, भनपुरी, खमतराई, सड्डू, सुंदर नगर, कुशालपुर और पुरानी बस्ती सहित कई क्षेत्रों में पानी का रंग बदला हुआ नजर आया। गंदे पानी की आपूर्ति के कारण कई परिवारों ने इसे पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया। दीपावली की तैयारियों के बीच लोगों को पीने के साफ पानी के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ी।
सुबह नलों से निकला पीला और मटमैला पानी
सोमवार सुबह जब लोग रोजाना की तरह घरेलू जरूरतों के लिए पानी भरने पहुंचे तो नलों से निकलने वाले पानी का रंग देखकर हैरान रह गए। कुछ इलाकों में पानी हल्का पीला दिखाई दिया, जबकि कुछ स्थानों पर पानी काफी मटमैला था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई।
भनपुरी की पुरानी बस्ती निवासी संध्या ने बताया कि उनके क्षेत्र में सुबह करीब छह से साढ़े छह बजे के बीच सरकारी नलों से पानी आता है। परिवार इसी पानी का इस्तेमाल पीने, नहाने और अन्य घरेलू कामों के लिए करता है। लेकिन सोमवार को नल से इतना गंदा पानी आया कि उसका उपयोग करना मुश्किल हो गया।
वहीं, सड्डू निवासी प्रीतम का कहना है कि उनके इलाके में पहले भी कई बार गंदे पानी की शिकायत सामने आ चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। सोमवार को दोबारा मटमैला पानी आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने से बदला पानी का रंग
नगर निगम के फिल्टर प्लांट के कार्यपालन अभियंता नरसिंग फरेंद्र के अनुसार, हाल में हुई बारिश के कारण नदी का जलस्तर करीब 30 इंच बढ़ गया था। इसके चलते नदी के पानी के रंग में बदलाव आया।
अधिकारी ने बताया कि रात में जलापूर्ति के दौरान पानी को साफ करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर और चूने की आवश्यक मात्रा का उपयोग नहीं हो सका। फिटकरी डालने के बावजूद पानी का रंग पूरी तरह साफ नहीं हुआ। इसके बाद इसी स्थिति में जलापूर्ति कर दी गई, जिसके कारण कुछ इलाकों में हल्के पीले रंग का पानी पहुंचा।
हालांकि, पानी का रंग बदलना उसकी वास्तविक गुणवत्ता और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए पानी के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच जरूरी है।
पाइपलाइन लीकेज की आशंका, पहले भी आ चुकी हैं शिकायतें
शहर में स्मार्ट सिटी और अमृत योजना के तहत पेयजल पाइपलाइन से जुड़े काम जारी हैं। ऐसे में पुरानी पाइपलाइन, कमजोर जोड़ और संभावित लीकेज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है और उसके आसपास नालियां हैं, तो बाहरी गंदगी पेयजल में मिल सकती है।
जनवरी 2026 में भी रायपुर के रामनगर, कचना और सड्डू की कुछ कॉलोनियों में झागदार और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आई थीं। उस दौरान कुछ स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज मिलने और मरम्मत किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
नगर निगम से पानी की गुणवत्ता जांचने की मांग
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद नागरिकों ने नगर निगम से प्रभावित इलाकों में पानी की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल फिल्टर प्लांट में पानी साफ करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पाइपलाइन की स्थिति और संभावित लीकेज की भी जांच होनी चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। पानी के नमूनों की जांच, पाइपलाइन की निगरानी और लीकेज की मरम्मत जैसे कदम उठाना जरूरी है, ताकि दीपावली के त्योहार के दौरान लोगों को साफ पानी के लिए परेशान न होना पड़े। नागरिकों को उम्मीद है कि नगर निगम जल्द कार्रवाई कर इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा।