
बिलासपुर : न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और पेंशन प्रकरण में लापरवाही अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। परिवार पेंशन के लिए एक महिला को न्याय की लड़ाई लड़नी पड़ी और हाईकोर्ट के बार-बार निर्देश के बावजूद विभागीय अधिकारी जवाब पेश करने में टालमटोल करते रहे। आखिरकार मामले में शासन ने कड़ा कदम उठाते हुए मुंगेली के तत्कालीन प्रभारी डीईओ और वर्तमान में बिलासपुर संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ एलपी डाहिरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
राज्य शासन ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत की है। निलंबन आदेश में पेंशन प्रकरणों में लापरवाही, न्यायालयीन निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता को कार्रवाई का आधार बताया गया है। निलंबन अवधि में डाहिरे का मुख्यालय बिलासपुर डीईओ कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें सक्षम स्वीकृति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान वे मूलभूत नियम 53 के तहत निर्वाह भत्ता पाने के पात्र होंगे।
पेंशन के लिए भटकती रही महिला
पूरा मामला राजेश्वरी त्रिपाठी से जुड़ा है। उनके पति की मृत्यु के बाद भी उन्हें परिवार पेंशन का लाभ नहीं दिया गया। अपने हक के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद राहत नहीं मिलने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता के माध्यम से दायर याचिका में राज्य शासन के आदेश को चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को अपना पक्ष रखने के लिए कई अवसर दिए, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने निर्धारित अवसरों के बावजूद जवाब पेश नहीं किया।
कोर्ट नाराज, शिक्षा सचिव को जारी किया नोटिस
न्यायालय के निर्देशों के लगातार पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर तलब किया और जवाब पेश नहीं करने का कारण शपथपत्र के साथ बताने का निर्देश दिया। न्यायालय की इस सख्ती के बाद विभाग में हलचल मच गई।
पहले 6 कर्मचारी निलंबित, अब डाहिरे पर गिरी गाज
स्कूल शिक्षा सचिव के न्यायालय में उपस्थित होने से पहले ही विभाग ने इस पेंशन प्रकरण में लापरवाही के आरोप में छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। इनमें दो प्राचार्य भी शामिल थे। अब इसी मामले में तत्कालीन प्रभारी डीईओ एलपी डाहिरे पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
इस कार्रवाई से यह साफ है कि पेंशन जैसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी को शासन गंभीरता से ले रहा है। एक विधवा को अपने वैधानिक हक के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी और मामला विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया। अब देखना होगा कि राजेश्वरी त्रिपाठी को परिवार पेंशन का लाभ कब तक मिलता है।