
जगदलपुर। बस्तर में गरीबों के लिए सरकारी राशन योजना पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचने वाला चावल कथित तौर पर खुले बाजार में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। सूचना मिलने पर खाद्य विभाग और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पिकअप वाहन समेत करीब 25 से 30 बोरी पीडीएस चावल जब्त कर लिया हैं। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीबों के हिस्से का सरकारी राशन आखिर बाजार तक पहुंच कैसे रहा है? क्या यह सिर्फ एक व्यापारी का मामला है या फिर इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है?
सूचना मिली... पीछा हुआ... और पकड़ लिया गया PDS चावल
जानकारी के अनुसार, केशलूर क्षेत्र से एक पिकअप वाहन में सरकारी राशन का चावल ले जाए जाने की सूचना मिली थी। सूचना पर खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वाहन की जांच की। बारिश के कारण मौके पर बोरियों की सटीक गिनती नहीं हो सकी, लेकिन अधिकारियों ने लगभग 25 से 30 बोरी पीडीएस चावल होने की पुष्टि की। वाहन और पूरा माल जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच में सामने आया व्यापारी का नाम
प्रारंभिक जांच में खाद्य विभाग को जानकारी मिली कि जब्त चावल कथित रूप से सुनील गुप्ता नामक किराना व्यापारी से जुड़ा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार संबंधित व्यापारी के खिलाफ पहले भी पीडीएस चावल की खरीद-बिक्री के आरोपों में कार्रवाई हो चुकी है। बताया गया कि पूर्व में उसका प्रतिष्ठान सील किया गया था, जिसे बाद में कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद जुर्माना जमा कराने पर खोला गया।
सबसे बड़ा सवाल: राशन दुकान से बाजार तक कौन पहुंचा रहा चावल?
इस पूरे मामले ने सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- आखिर पीडीएस का चावल राशन दुकानों से बाहर कैसे निकल रहा है?
- क्या इसमें सिर्फ व्यापारी शामिल हैं या सप्लाई चेन के अन्य लोग भी?
- क्या जांच केवल वाहन जब्त करने तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा?
- जिन राशन दुकानों से चावल बाहर निकला, उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
खाद्य विभाग ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
खाद्य विभाग का कहना है कि गरीबों के लिए निर्धारित सरकारी चावल की अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक पूरे मामले की जांच जारी है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें
बस्तर में पीडीएस चावल की कालाबाजारी का यह पहला मामला नहीं है। समय-समय पर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई हितग्राहियों को यह कहकर राशन नहीं दिया जाता कि "इस महीने स्टॉक नहीं आया", जबकि वही सरकारी चावल बाद में खुले बाजार में बिकता दिखाई देता है। यही वजह है कि इस कार्रवाई के बाद लोगों की नजर अब इस बात पर है कि जांच सिर्फ वाहन और व्यापारी तक सीमित रहती है या फिर पूरे नेटवर्क का खुलासा कर जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचती है।