• 2017-18 के पहले सर्वे में खारिज निर्माण, 2022-23 में मान लिए गए पुराने
  •  एक ही मकान से कागजों में निकले तीन नाम, 2.40 करोड़ का हुआ भुगतान
  • जमीन पर सिर्फ मिट्टी का घर, लेकिन मूल्यांकन सूची में 69 लाख रुपए पास

 

रायपुर/रायगढ़

रायगढ़ जिले में एनटीपीसी की तिलईपाली कोयला खदान के लिए अधिग्रहित भूमि के सर्वे और मुआवजे में घालमेल के मामले सामने आए हैं। वर्ष 2017-18 में जो मुआवजा तय किया गया था, 2022-23 में दोबारा सर्वे होने पर वह कई गुना बढ़ गया। हमारी दस्तावेजी पड़ताल में ऐसे कई रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

तिलईपाली खदान के लिए चार पंचायतों के आठ गांव- तिलईपाली, बिछिनारा, नयारामपुर, कुदुरमोहा, रायकेरा, चोटीगुड़ा, अजीतगढ़ और साल्हेपाली की भूमि अधिग्रहित की गई है। दोनों सर्वे राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ पीडब्ल्यूडी और आरईएस के इंजीनियरों की मौजूदगी में हुए थे। इसके बावजूद परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और स्वामित्व को लेकर दस्तावेजों में भारी विरोधाभास दिखाई देता है।

 

जमीनी सच्चाई: मिट्टी का पुराना घर और मुआवजा 69 लाख

 

तिलईपाली के टीपीएच-505 (आबादी भूमि) पर अमीर राठिया काबिज हैं। पुराने सर्वे और मूल्यांकन में इनका मुआवजा लगभग 9 लाख 37 हजार रुपए निर्धारित था। नए सर्वे के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 69 लाख रुपए हो गई। भास्कर ने जब घर पहुंचकर स्थिति देखी, तो वहां मिट्टी का पुराना मकान और खपरैल की छत मिली।

मुआवजा मिलने के बाद अमीर के खाते से 49 लाख 50 हजार रुपए खगेश्वर गुप्ता के दो परिजनों के खातों में स्थानांतरित किए गए। अमीर ने खगेश्वर के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है।

 

पहले सर्वे में खारिज, दूसरे में पुराना मानकर बांटे 16.48 लाख

 

केस-1:तिलईपाली के देहरीलाल गुप्ता (मकान क्रमांक टीपीएच-573)। पहले सर्वे में तीन बरामदों को 15 जनवरी 2018 के बाद निर्मित बताकर मुआवजे से बाहर किया गया था। लेकिन 2022-23 के सर्वे में इन्हीं बरामदों को पुराने निर्माण के रूप में स्वीकार कर उनके लिए 16 लाख 48 हजार 800 रुपए अतिरिक्त जोड़ दिए गए। एक ही निर्माण पर दो अलग-अलग निष्कर्ष कैसे सामने आए, यह सवाल दस्तावेजों से उठता है।

 

पुराने सर्वे में उल्लेख नहीं, बाद में एक ही मकान में शामिल तीन नाम

 

केस-2:पुराने सर्वे और मूल्यांकन सूची में टीपीएच-587 के बाद सूची में टीपीएच-600 दर्ज है। टीपीएच-588-ए का उल्लेख सूची में नहीं मिलता। हालांकि बाद की प्रक्रिया में चुत्रीलाल गुप्ता के साथ उनकी पत्नी लीलावती (588-बी) और पुत्र राजेश गुप्ता (588-सी) के नाम पर भी मुआवजा स्वीकृत हुआ। तीनों को मिलाकर लगभग 2.40 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। ये प्रविष्टियां बाद में किस आधार पर जोड़ी गईं, इस संबंध में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जानकारी होने से इनकार किया।

 

प्रशासन के प्रमाणित पत्रक पर भुगतान किया: एनटीपीसी

 

इस मामले में एनटीपीसी का कहना है कि उसने प्रशासन द्वारा प्रमाणित मुआवजा पत्रक के आधार पर ही भुगतान किया है और सर्वे प्रक्रिया में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

 

एसडीएम बोले- शिकायत पर जांच होगी

 

एसडीएम प्रवीण तिवारी ने कहा, "मुझे मुआवजा बढ़ाए जाने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसी कोई शिकायत आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। मैं दस्तावेज देखकर ही कुछ बता सकूंगा।"