
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित पूंजीपथरा के रायगढ़ इस्पात एंड पावर लिमिटेड प्लांट में बुधवार को प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। प्लांट के एक फर्नेस के हिस्से से सुबह से ही गर्म हवा का रिसाव हो रहा था, लेकिन इसके बावजूद भी प्रबंधन ने काम नहीं रोका और उत्पादन जारी रखा। इसी लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि दोपहर करीब साढ़े 12 बजे फर्नेस पंचर हो गया।
फर्नेस के किनारे से अचानक तेज धमाके जैसी आवाज के साथ गर्म गैस, धुआं और स्टीम बाहर निकलने लगी। इस हादसे में चार श्रमिक घायल हो गए हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना के वक्त फर्नेस वाली जगह से करीब 40 मीटर की दूरी पर क्रेन मेंटेनेंस का काम चल रहा था। अचानक हुए जोरदार धमाके को सुनकर क्रेन ऑपरेटर घबरा गया और उसने डर के मारे ऊपर से ही छलांग लगा दी। नीचे गिरने से ऑपरेटर का हाथ टूट गया। इसके अलावा दो कर्मचारी गर्म स्टीम की चपेट में आने की वजह से झुलस गए। जबकि, कंट्रोल रूम में मौजूद एक अन्य कर्मचारी को भी चोट आई है।
प्लांट में काम कर रहे फिटर अर्जुन राजभर ने बताया कि दोपहर में सब अपने-अपने काम में लगे हुए थे। वह फर्नेस से करीब 100 मीटर दूर था। तभी अचानक बम फटने जैसी तेज आवाज आई। जब वह दौड़कर मौके पर पहुंचा, तो देखा कि चार श्रमिक जमीन पर गिरे पड़े हैं। कुछ श्रमिक जान बचाकर भाग रहे थे। हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। सुपरवाइजर को सूचना देकर एंबुलेंस बुलाई गई और घायलों को तुरंत अपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
घायल होने वालों में यूपी के रहने वाले क्रेन ऑपरेटर फूलेन्द्र कुमार (27), सीनियर फिटर अमरेश कुमार (34), इलेक्ट्रिशियन फिरोज आलम खान (35) और जांजगीर-चांपा निवासी रामनाथ सूर्यवंशी शामिल हैं। रामनाथ की स्थिति गंभीर है, उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया है।
घटना को लेकर रायगढ़ इस्पात के जनरल मैनेजर सुनील पंडा ने सफाई देते हुए कहा है कि हादसा बरसात के कारण रॉ मटेरियल में आई नमी के चलते हुआ है। फर्नेस गर्म था, नमी वाला रॉ मटेरियल डालने से गैस व धुएं का दबाव बन गया और गर्म गैस बाहर निकलने लगी। सूचना मिलने पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और प्लांट का निरीक्षण किया। उप संचालक राहुल पटेल का कहना है कि श्रमिकों का बयान दर्ज किया गया है, सही कारण जांच के बाद ही पता चलेगा।
जुर्माने के बाद भी नहीं सुधरे हालात
यह हादसा औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो-तीन साल के भीतर ही जिले में 125 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से 96 मामलों का निराकरण कर उद्योगों से लगभग 1 करोड़ 96 लाख 57 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया है। लाखों रुपए की वसूली और लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद सुरक्षा मानकों में लापरवाही जारी है और हालात नहीं सुधरे हैं।