रायपुर। राजधानी रायपुर के चौराहों पर ट्रैफिक मॉनिटरिंग के लिए लगे आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के कैमरों और सिग्नलों को लेकर आखिर अफसरों की नींद टूट ही गई। पिछले 10 महीनों से इस सिस्टम का मेंटेनेंस पूरी तरह से ठप पड़ा था। कारण था मेंटेनेंस का जिम्मा संभाल रही एजेंसी के बिलों का अटका रहना। अब पुलिस विभाग ने इस काम के लिए 12 करोड़ रुपए की राशि मंजूर कर दी है। इसके साथ ही एजेंसी के बकाया भुगतान का रास्ता खुल गया है।

यह पूरा वाकया सरकारी विभागों के बीच फंड को लेकर होने वाली लालफीताशाही की असल तस्वीर दिखाता है। नगर निगम के पास मेंटेनेंस एजेंसी को देने के लिए पैसे नहीं थे। जब एजेंसी को काम के बदले रकम मिलना बंद हो गई, तो उसने भी हाथ खड़े कर दिए। नतीजा यह हुआ कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगे महंगे कैमरे और सिग्नल देखरेख के अभाव में खराब होने लगे। कहीं कैमरों ने काम करना बंद कर दिया तो कहीं सिग्नलों में तकनीकी दिक्कतें आने लगीं।

नगर निगम के अधिकारी अपनी तरफ से पुलिस विभाग को लगातार पत्राचार कर रहे थे। भुगतान के लिए सात से आठ बार बाकायदा लेटर लिखा गया। इसके बावजूद 10 महीने तक फाइलें दबी रहीं। इस बीच 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिल पेंडिंग हो गया। विभागों के बीच चल रही इस चिट्ठी-पत्री के कारण शहर का करोड़ों का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भगवान भरोसे छूट गया था।

बीते 21 अगस्त को डीबी स्टार ने इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए ग्राउंड रिपोर्ट छापी। रिपोर्ट में बताया गया कि किस तरह नगर निगम पेमेंट करने में असहाय महसूस कर रहा है और सिस्टम कैसे प्रभावित हो रहा है। अखबार में मामला सामने आने के बाद पुलिस और निगम के महकमे में हलचल मची। अफसरों ने कागजी कार्रवाई की रफ्तार बढ़ाई और अंततः पुलिस विभाग की ओर से आईटीएमएस के पुराने और रुके हुए भुगतान के लिए 12 करोड़ रुपए की मंजूरी जारी कर दी गई।

अतिरिक्त डीसीपी (ट्रैफिक) डॉ. अर्चना झा ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आईटीएमएस के मेंटेनेंस भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। 12 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी मिल चुकी है। अब केवल फंड ट्रांसफर होने की कागजी औपचारिकता बाकी है। जल्द ही पैसा संबंधित खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। जैसे ही रकम जारी होगी, मेंटेनेंस एजेंसी के पेंडिंग बिल क्लियर कर दिए जाएंगे। इसके तुरंत बाद मेंटेनेंस का काम दोबारा शुरू करा दिया जाएगा।

फंड रिलीज होने से उस मेंटेनेंस एजेंसी को भी राहत मिलेगी जो महीनों से अपना पैसा फंसने के कारण काम रोके बैठी थी। अब चौराहों पर लगे उन कैमरों और सिग्नलों की मरम्मत हो सकेगी जो लंबे समय से देखरेख के इंतजार में थे।