रायपुर | राजधानी रायपुर में 25 लाख की आबादी की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पुलिस बल की कमी से जूझ रही है। रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिस के अंतर्गत अलग-अलग रैंक के करीब 660 पद खाली पड़े हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पुलिस बल की कमी को दूर करने के साथ-साथ पुलिस कमिश्नरी का दायरा पूरे जिले में बढ़ाने की मांग रखी है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में बताया है कि राजधानी में लगातार बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को नियंत्रित करने के लिए 460 पुलिसकर्मियों के पद मंजूर किए गए हैं। इसके विपरीत, व्यवस्था को संभालने के लिए केवल 390 पुलिसकर्मी ही तैनात हैं। इसी तरह, रायपुर जिले में 522 सिपाही, 43 हवलदार, 9 सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), 82 उप-निरीक्षक (एसआई) और 4 सूबेदार सहित कुल 660 पुलिसकर्मियों के पद रिक्त हैं। बल की इस कमी के कारण शहर की पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए सांसद ने दूसरे जिलों से 500 पुलिसकर्मियों को तत्काल रायपुर में अस्थायी रूप से पदस्थ करने का सुझाव दिया है।

रहवासी शहर के, लेकिन थाना ग्रामीण क्षेत्र का

सांसद ने पत्र में थानों की सीमाओं को लेकर मौजूद विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। उन्होंने कुछ क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि स्वर्णभूमि कॉलोनी, राजधानी विहार, कचना, सत्यम नगर, डूमरतराई, महात्मा गांधी वार्ड और मोतीलाल नेहरू वार्ड जैसे इलाके रायपुर नगर निगम सीमा के अंतर्गत आते हैं। लोग शहरी इलाके में रह रहे हैं, लेकिन इनका थाना क्षेत्र ग्रामीण पुलिस के दायरे में आता है। सांसद का कहना है कि इन क्षेत्रों को तुरंत कमिश्नरेट का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि कार्यप्रणाली में एकरूपता आ सके।

पूरे जिले में हो कमिश्नरेट प्रणाली

जिले में पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सांसद ने पूरे रायपुर जिले में चरणबद्ध तरीके से पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की बात कही है। उनके अनुसार, ऐसा करने से सरकार का अतिरिक्त खर्च कम होगा और पूरे रायपुर जिले में पुलिसिंग एक जैसी रहेगी।

अधिकारियों के लिए कार्यालय और वाहन नहीं

वर्तमान में कमिश्नरेट का गठन होने के बाद प्रशासनिक ढांचे में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, 5 डीसीपी और 18 एसीपी के पद तो स्वीकृत किए गए हैं। अधिकारियों की पदस्थापना के बावजूद उनके लिए स्थायी कार्यालय भवन और शासकीय वाहन अब तक उपलब्ध नहीं हैं। पत्र में इन बुनियादी सुविधाओं को भी जल्द मुहैया कराने की आवश्यकता जताई गई है ताकि कमिश्नरेट प्रणाली पूरी तरह से काम कर सके।