
रायपुर। सरकारी एजेंसियों से घर खरीदना रायपुर के सैकड़ों लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। हाउसिंग बोर्ड और आरडीए के हाउसिंग प्रोजेक्ट सालों से अधूरे पड़े हैं। आम आदमी अपनी जीवन भर की कमाई जमा करने के बाद भी दर दर भटक रहा है। हालत यह है कि लोग बैंक से लिए गए लोन की किश्त भी भर रहे हैं और अपने वर्तमान मकान का किराया भी चुका रहे हैं। 10 से 12 साल पहले जिन लोगों ने अपने घर की बुकिंग कराई थी उन्हें अब तक चाबी नहीं मिली है।
आरडीए प्रोजेक्ट में ठेकेदार की मनमानी
रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के रो हाउस प्रोजेक्ट का हाल सबसे ज्यादा खराब है। यहां 258 लोगों के पैसे फंसे हुए हैं। साल 2018 और 2019 में इन लोगों ने बुकिंग के नाम पर लगभग 8 लाख रुपये प्रति व्यक्ति जमा किए थे। निर्माण शुरू तो हुआ लेकिन ठेकेदार अपना आधा काम छोड़कर भाग गया। प्रशासन ने समय रहते ठेकेदार पर कोई लगाम नहीं लगाई। अब इतने साल बाद प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। हितग्राही आज भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं।
12 साल से हाउसिंग बोर्ड के घर अधूरे
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर 16 और सेक्टर 34 में चल रहे प्रोजेक्ट भी सरकारी लेटलतीफी का शिकार हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट में लोगों ने साल 2014 और 2015 में बड़ी रकम जमा कराई थी। प्रत्येक हितग्राही से 8 से 10 लाख रुपये लिए गए। आज 12 साल बाद भी वहां ईंट और सीमेंट का ढांचा ही खड़ा है। लोग हर महीने अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा किश्त में दे रहे हैं और उन्हें नहीं पता कि उन्हें उनका घर कब मिलेगा।
क्यों हो रही इतनी देरी
पड़ताल में यह बात सामने आई है कि सरकारी विभाग बिना किसी ठोस प्लानिंग के ही प्रोजेक्ट लॉन्च कर देते हैं। प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन की स्थिति और निर्माण लागत का सही आकलन नहीं किया जाता है।
ठेकेदारों को काम देने से पहले उनके पुराने रिकॉर्ड और वित्तीय क्षमता की जांच नहीं की जाती।
बजट और फंडिंग को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं होती है जिससे बीच में काम रुक जाता है।
काम बीच में छोड़कर जाने वाले ठेकेदारों पर तुरंत कार्रवाई करने के सख्त नियम नहीं हैं।
व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक प्रोजेक्ट का पूरा खाका और बजट तैयार ना हो जाए तब तक आम जनता से बुकिंग राशि नहीं लेनी चाहिए। टेंडर की शर्तें इतनी सख्त होनी चाहिए कि ठेकेदार काम ना छोड़ सके। ऐसा होने पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे मामले पर आरडीए अध्यक्ष नंदे साहू का रटा रटाया जवाब सामने आया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य प्रगति पर है और लोगों को जल्द मकान दिए जाएंगे।