
मुंहासे यानी एक्ने सिर्फ हार्मोनल बदलाव या ऑयली स्किन की वजह से ही नहीं होते। तनाव और मानसिक दबाव भी कुछ लोगों में एक्ने को बढ़ाने या पहले से मौजूद मुंहासों को ज्यादा गंभीर बनाने में भूमिका निभा सकता है। खासतौर पर पढ़ाई, नौकरी, नींद की कमी या लगातार तनाव के दौर में कई लोगों को स्किन में बदलाव नजर आने लगते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चेहरे पर हर पिंपल की वजह सिर्फ स्ट्रेस है। एक्ने के पीछे हार्मोन, सीबम यानी त्वचा का तेल, बंद पोर्स, बैक्टीरिया, आनुवंशिक कारण और कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
रिसर्च में क्या सामने आया?
कई अध्ययनों में तनाव और एक्ने की गंभीरता के बीच संबंध देखने को मिला है। खासतौर पर मेडिकल छात्रों और युवाओं पर किए गए अध्ययनों में पाया गया कि जिन लोगों में तनाव का स्तर अधिक था, उनमें एक्ने की गंभीरता भी अधिक देखी गई। कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि तनाव के साथ-साथ नींद की कमी, अनियमित खान-पान, फास्ट फूड और हाई ग्लाइसेमिक फूड का ज्यादा सेवन भी मुंहासों की समस्या को प्रभावित कर सकता है। इसलिए एक्ने को केवल एक ही कारण से जोड़कर देखना सही नहीं माना जाता।
स्ट्रेस से पिंपल्स कैसे बढ़ सकते हैं?
तनाव के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल और न्यूरोएंडोक्राइन बदलाव होते हैं। स्ट्रेस से जुड़ी प्रक्रियाएं त्वचा में सूजन, तेल बनने की प्रक्रिया और त्वचा की संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से एक्ने की समस्या है, तो लगातार तनाव उसके लक्षणों को और बढ़ा सकता है। इसके अलावा स्ट्रेस के दौरान नींद खराब होना, स्किन केयर रूटीन बिगड़ना या चेहरे को बार-बार छूने जैसी आदतें भी स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। यानी स्ट्रेस को एक्ने का अकेला कारण नहीं, बल्कि एक संभावित ट्रिगर या समस्या बढ़ाने वाले फैक्टर के तौर पर समझना ज्यादा सही है।
क्या चेहरे की जगह देखकर बीमारी का पता चलता है?
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अक्सर दावा किया जाता है कि माथे के पिंपल्स पाचन या लिवर की समस्या, नाक के आसपास के मुंहासे हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल और गालों के पिंपल्स सांस से जुड़ी बीमारी का संकेत होते हैं। इन दावों को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। एक्ने की जगह देखकर किसी अंदरूनी बीमारी का निश्चित निदान नहीं किया जा सकता। अगर मुंहासे लगातार बने हुए हैं या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना ज्यादा बेहतर तरीका है।
स्ट्रेस के अलावा ये कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार
एक्ने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जैसे
- हार्मोनल बदलाव
- त्वचा में ज्यादा सीबम बनना
- पोर्स का बंद होना
- आनुवंशिक प्रवृत्ति
- कुछ कॉस्मेटिक या हेयर प्रोडक्ट्स
- नींद की कमी और खराब लाइफस्टाइल
- कुछ लोगों में हाई ग्लाइसेमिक डाइट
- कुछ दवाओं या हार्मोनल स्थितियों का प्रभाव
धूल और प्रदूषण त्वचा को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हर मामले में इन्हें एक्ने का मुख्य कारण मानना सही नहीं है।
पिंपल्स कम करने के लिए क्या करें?
तनाव को मैनेज करने के साथ पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान और नियमित स्किन केयर रूटीन बनाए रखना मददगार हो सकता है। पिंपल्स को बार-बार दबाने या फोड़ने से बचें, क्योंकि इससे सूजन और दाग बढ़ सकते हैं। अगर एक्ने लगातार बना रहता है, दर्दनाक या गहरे पिंपल्स हो रहे हैं, चेहरे पर दाग पड़ रहे हैं या घरेलू उपायों से समस्या ठीक नहीं हो रही है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।
नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। स्ट्रेस और एक्ने के बीच संबंध व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकता है। लगातार या गंभीर एक्ने की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।