रायपुर नगर निगम में हरियाली के नाम पर भारी भ्रष्टाचार सामने आया है। उद्यानिकी विभाग के अफसरों और ठेकेदारों ने मिलकर करोड़ों रुपये डकार लिए। 3 करोड़ रुपये खर्च करके शहर में 30 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया था। यह दावा पूरी तरह से झूठा साबित हुआ है। जमीन पर जाकर देखने से पता चलता है कि मुश्किल से तीन हजार पौधे ही लगे हैं। बाकी 27 हजार पौधे हवा में ही गायब हो गए। इस बड़े घोटाले को दबाने के लिए अब अफसर जवाब देने से भाग रहे हैं। एमआईसी सदस्य ने एक साल पहले इस फर्जीवाड़े की जानकारी मांगी थी। आज तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि खुद को बचाने के लिए अफसरों ने इस पूरे मामले की फाइल ही गायब कर दी है।

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अफसरों ने बिना जांच बांट दिए 2 करोड़ 43 लाख रुपये

यह पूरा फर्जीवाड़ा साल 2022 और 2023 के दौरान किया गया। इसके लिए 15वें वित्त आयोग के पैसों का जमकर दुरुपयोग किया गया। गणपति इन्फ्रास्ट्रक्चर नाम की एजेंसी को यह ठेका दिया गया था। ठेकेदार को सिर्फ पौधे नहीं लगाने थे बल्कि पांच साल तक उनकी देखभाल भी करनी थी। निगम के अफसरों की लापरवाही देखिए कि बिना जांच किए ही ठेकेदार को 2 करोड़ 43 लाख रुपये का भारी भरकम भुगतान भी कर दिया गया। अब करीब 71 लाख रुपये का पेमेंट बाकी है जो टेंडर खत्म होने पर मई 2026 में दिया जाना है। जनता का पैसा खुलेआम लूटा गया और अफसर आंखें मूंद कर बैठे रहे।

 

सूखे पौधे और खाली गड्ढे खोल रहे घोटाले की पोल

इस घोटाले की जमीनी हकीकत और भी चौंकाने वाली है। लभांडी इलाके में 12 हजार 240 पौधे लगाने का झूठा आंकड़ा पेश किया गया। जुलाई महीने में 5 हजार और पौधे लगाने की कहानी रची गई। हकीकत में वहां सिर्फ 1500 से 2000 पौधे ही नजर आ रहे हैं। जो नए पौधे लगाए गए थे उनमें से ज्यादातर सूख चुके हैं। कई जगहों पर तो पौधे हैं ही नहीं सिर्फ खाली गड्ढे भ्रष्टाचार का सुबूत दे रहे हैं। पौधों को पानी देने के लिए लगाए गए बोरवेल बंद पड़े हैं। कोई भी इनकी देखभाल करने नहीं आता है। हिमालय हाइट्स के पास 3 हजार पौधे लगाने का दावा था लेकिन वहां भी जमीन खाली पड़ी है। पंडरी में 8 हजार 265 गांधी उद्यान में 2 हजार 565 और भाठागांव में 3 हजार 500 पौधे लगाने की बात भी सिर्फ कागजी साबित हुई है।

एक साल बाद भी जांच अधूरी सब नियम ताक पर रखे

नगर निगम की ढिलाई यहीं खत्म नहीं होती। एमआईसी सदस्य भोलाराम साहू ने एक साल पहले ही मौके का मुआयना किया था। उन्होंने देखा था कि तय संख्या से बहुत कम पौधे लगे हैं। उन्होंने अफसरों से पूरी जानकारी और जांच रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन एक साल बाद भी जांच रिपोर्ट का कोई अता पता नहीं है। मेयर मीनल चौबे का वही पुराना जवाब है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। मियावाकी तकनीक से कम जगह में घने पौधे लगाने का नियम था। लेकिन भ्रष्टाचार के इस खेल में सारे नियम ताक पर रख दिए गए। अफसरों और ठेकेदार की इस मिलीभगत ने शहर की हरियाली को कागजों में ही दफना दिया है और अब कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।