
अंबिकापुर। उत्तर छत्तीसगढ़ में इन दिनों रेत माफियाओं ने सिस्टम को अपनी जेब में रख लिया है। वैसे तो कागजों पर 10 जून से नदियों से रेत निकालने पर सरकारी रोक लगी हुई है, लेकिन माफियाओं ने इस आदेश को सरेआम ठेंगा दिखा दिया है। ताज़ा मामला सरगुजा मुख्यालय अंबिकापुर का है, जहां गुंडागर्दी की ऐसी तस्वीर सामने आई है जो साफ बताती है कि इन तस्करों को पुलिस या प्रशासन का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।
रायपुर से आई खनिज विभाग की स्पेशल फ्लाइंग स्क्वायड टीम ने सोमवार रात कार्रवाई करते हुए अंबिकापुर आ रही रेत से भरी चार गाड़ियां (टीपर) पकड़ीं। अब इन गाड़ियों को सुरक्षित कलेक्ट्रेट ले जाने के लिए टीम ने अपने आरक्षक तारकेश्वर वर्मा को एक गाड़ी में बैठा दिया। लेकिन शहर के गांधी चौक पहुंचते ही रेत माफियाओं का 'फिल्मी एक्शन' शुरू हो गया। रेत के काले कारोबार से जुड़े लड्डन खान और उसके साथियों ने बीच रास्ते में गाड़ियां रोक लीं। जब आरक्षक तारकेश्वर ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए विरोध किया, तो इन दबंगों ने बीच सड़क पर उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद वे सीना तानकर रेत से भरी वह गाड़ी छीनकर फरार हो गए। बाकी तीन गाड़ियां जैसे-तैसे कलेक्ट्रेट तक पहुंचाई गईं।
सोचिए, शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में सरकारी टीम के आदमी को पीटा जाता है और प्रशासन की जब्त की हुई गाड़ी लूट ली जाती है! ये हैरान करने वाला हाल तब है, जब कोरिया जिले में रेत तस्करी के विवाद में अभी हाल ही में एक भाजपा नेता समेत तीन लोगों की हत्या हो चुकी है। उस खूनी खेल के बाद भी तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अब सीधे स्टेट लेवल की टीम से भिड़ रहे हैं।
अब घटना के बाद पुलिस की वही पुरानी 'लकीर पीटने' वाली कार्रवाई शुरू हो गई है। गांधीनगर थाने में आरक्षक की शिकायत पर लड्डन खान, टीपर ड्राइवर सोनू, खलासी और कुछ अन्य पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश का दावा कर रही है।
दूसरी तरफ, खनिज विभाग के संचालक रजत बंसल के निर्देश पर उड़नदस्ता टीम लगातार कोरिया, एमसीबी और सूरजपुर में घूम-घूमकर जांच कर रही है। आसमान में ड्रोन कैमरे उड़ाए जा रहे हैं। 22 जून को टीम ने महान नदी के घाटों का दौरा किया और बरबसपुर, लटोरी, खड़गवां और सकालो जैसी जगहों पर छापे मारकर कुछ गाड़ियां थानों में खड़ी भी करवाईं।
लेकिन यहाँ सबसे बड़ी बात यही है कि ऊपर आसमान में विभाग के ड्रोन उड़ रहे हैं और नीचे सड़क पर माफिया खुलेआम सरकारी आदमी को पीटकर गाड़ी लूट रहे हैं। 10 जून के बाद भी रोज रातों-रात नदियां खोखली की जा रही हैं। जब माफिया बीच सड़क से पकड़ी हुई गाड़ियां ही छीन ले जा रहे हैं, तो इन छापों और वीडियोग्राफी का क्या मतलब रह जाता है? जब तक सिस्टम का डंडा असल में नहीं चलेगा, ये रेत के सौदागर ऐसे ही बीच चौराहे पर कानून की धज्जियां उड़ाते रहेंगे।