रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार राज्य की विभिन्न उपार्जन समितियों में अब भी 81,827.37 मीट्रिक टन धान शेष दर्ज है, जबकि कई स्थानों पर भौतिक सत्यापन के दौरान स्टॉक नहीं मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में प्रशासन की नजर अब उन समितियों पर है, जहां कागजों और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जा रहा है।

पिछले खरीफ सीजन में राज्यभर की 2,740 सहकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी की गई थी। नियमानुसार खरीदे गए धान का परिवहन संग्रहण केंद्रों या राइस मिलों तक निर्धारित समय में होना था, लेकिन परिवहन और उठाव में देरी के कारण बड़ी मात्रा में धान रिकॉर्ड में लंबित दिख रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक केवल दंतेवाड़ा, कोरबा और धमतरी जिलों में ही धान का शत-प्रतिशत उठाव पूरा हो सका है, जबकि अन्य जिलों में अभी भी स्टॉक दर्ज है।

मानसून की शुरुआत के बीच यह मामला और गंभीर हो गया है। यदि धान वास्तव में उपार्जन केंद्रों में मौजूद है तो उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं जिन केंद्रों पर रिकॉर्ड में धान दर्ज है, लेकिन मौके पर स्टॉक नहीं मिल रहा, वहां जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में लापरवाही या अनियमितता की जांच जरूरी होगी।

सूत्रों के अनुसार, जिन समितियों में धान की कमी पाई जाएगी, वहां संबंधित प्रबंधकों को या तो कमी के बराबर धान जमा करना होगा अथवा उसकी निर्धारित कीमत जमा करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन अब जिलेवार स्थिति की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।