
कोरबा : जरूरत के वक्त सैलरी एडवांस मिलने की उम्मीद एक प्रधान आरक्षक को ऐसी महंगी पड़ी कि जमा पूंजी के 8.50 लाख रुपये गंवा बैठे। साइबर ठगों ने पहले 8 लाख रुपये का सैलरी एडवांस दिलाने का भरोसा जीता और फिर तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर खाते में गलती से 10 लाख रुपये ट्रांसफर होने की कहानी गढ़ दी। हैरानी की बात यह रही कि खाते में एक रुपया भी नहीं आया और जवान ठगों के झांसे में आ गया। अतिरिक्त 2 लाख रुपये लौटाने की बात मानकर पूरी रकम दो अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा दी। ठगी का खुलासा तब हुआ, जब रकम लेने के बाद भी आरोपी ने और पैसे मांगने शुरू कर दिए।
मामला 11वीं वाहिनी, सी-कंपनी कोरबा में पदस्थ प्रधान आरक्षक रथराम सिदार (49) से जुड़ा है। उन्हें घरेलू जरूरतों के लिए करीब 8 लाख रुपये की आवश्यकता थी। इसी दौरान 29 अक्टूबर को एक मित्र के माध्यम से उन्हें सैलरी एडवांस की जानकारी मिली। उम्मीद के साथ उन्होंने एक सैलरी एडवांस ऐप के जरिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच ऐप के कस्टमर केयर के नाम पर चंदन कुमार नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और 8 लाख रुपये का एडवांस स्वीकृत कराने का भरोसा दिया।
खाते में रकम नहीं आई, वापसी के नाम पर करा लिया भुगतान
आरोपी ने कुछ देर बाद नया पैंतरा चला। उसने रथराम को बताया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनके खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए हैं, जबकि स्वीकृति केवल 8 लाख रुपये की थी। ठग ने अतिरिक्त दो लाख रुपये समेत पूरी रकम वापस करने को कहा। साथ ही यह भरोसा दिलाया कि रकम लौटाते ही 8 लाख रुपये का नया आवेदन स्वीकृत कर दिया जाएगा। उसने यह भी समझाया कि तकनीकी समस्या के कारण खाते में जमा रकम दिखाई नहीं दे रही है।
जालसाज की बातों में आकर प्रधान आरक्षक ने 29 अक्टूबर को दोपहर 12.59 बजे यस बैंक के एक खाते में 4.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद दोपहर 3.39 बजे करूर वैश्य बैंक में मोहम्मद मोसिन के खाते में आरटीजीएस के जरिए 4 लाख रुपये और जमा करा दिए। इस तरह सैलरी एडवांस पाने की उम्मीद में उन्होंने अपने पास से कुल 8.50 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में भेज दिए।
अतिरिक्त रकम मांगते ही हुआ संदेह
दोनों खातों में रकम पहुंचने के बाद भी जब आरोपी ने और पैसे जमा करने का दबाव बनाया, तब रथराम को पूरे मामले पर संदेह हुआ। उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच कराई तो पता चला कि 10 लाख रुपये जमा होने का दावा पूरी तरह फर्जी था। न तो कोई एडवांस स्वीकृत हुआ था और न ही खाते में कोई अतिरिक्त रकम आई थी। इसके बाद उन्हें समझ आया कि सैलरी एडवांस दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का शिकार बना लिया गया है। पीड़ित ने साइबर अपराध हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। साइबर पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।