
रायपुर : सरकारी विभाग में दर्ज शिक्षकों की निजी जानकारी अब साइबर ठगों के लिए हथियार बनती जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में सामने आ रहे संदिग्ध फोन कॉल्स ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया हैं। शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे सहित प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों को ठगों द्वारा निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही स्कूल या संस्था में पदस्थ शिक्षकों को एक ही मोबाइल नंबर से कॉल किए गये है। कॉल करने वाले खुद को साइबर क्राइम इंस्पेक्टर बताकर शिक्षकों को डराने और कथित कानूनी कार्रवाई का भय दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
पहले जताई थी आशंका, अब जांच की कर रहे मांग
शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ का कहना है कि उसने पहले ही शिक्षकों के डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। संघ को आशंका थी कि विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म या अन्य माध्यमों से शिक्षकों की संवेदनशील जानकारी असुरक्षित हाथों तक पहुंच सकती है। अब शिक्षकों को मिल रहे संदिग्ध कॉल्स ने इन आशंकाओं को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। संघ ने विभागीय स्तर पर इस्तेमाल किए जा रहे वीएसके ऐप और अन्य डिजिटल पोर्टलों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग उठाई है। हालांकि, अभी यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि शिक्षकों की जानकारी किसी सरकारी ऐप या पोर्टल से ही लीक हुई है। डेटा कहां से हासिल किया गया, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
डेटा विभाग के पास, फिर ठगों तक कैसे पहुंचा?
शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने इस पूरे मामले पर कहा कि शिक्षकों की व्यक्तिगत, शैक्षणिक और सेवा संबंधी जानकारियां विभिन्न विभागीय रिकॉर्ड और डिजिटल प्रणालियों में दर्ज रहती हैं। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि इन जानकारियों का दुरुपयोग कौन कर रहा है और ठगों तक इनकी पहुंच कैसे बनी। यदि शिक्षकों की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर उन्हें डराया जा रहा है और उनकी आर्थिक व सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या विभाग इस मामले में अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने और डेटा सुरक्षा में संभावित चूक की जांच कराने के लिए तैयार है? संघ का कहना है कि केवल शिक्षकों को सतर्क रहने की सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा। विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए कौन-से इंतजाम किए गए हैं और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत मिलने पर क्या कार्रवाई की जा रही है।
एक फोन कॉल, कई शिक्षक कानूनी कार्रवाई का डर
साइबर ठगों का तरीका भी चिंता बढ़ाने वाला है। खुद को पुलिस या साइबर क्राइम अधिकारी बताकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाना ठगी का जाना-पहचाना तरीका है। ऐसे मामलों में फोन करने वाला व्यक्ति किसी कथित अपराध, जांच या शिकायत का हवाला देकर सामने वाले को मानसिक दबाव में लेने की कोशिश करता है। घबराहट में व्यक्ति से निजी जानकारी, बैंक संबंधी विवरण या पैसे मांगे जा सकते हैं। शिक्षकों को एक ही नंबर से कॉल आने और एक ही संस्था के कई लोगों को निशाना बनाए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में कॉल रिकॉर्ड, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, संभावित डेटा स्रोत और किसी संगठित गिरोह की भूमिका की पड़ताल की जानी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं किसी कर्मचारी या संस्थान की जानकारी का दुरुपयोग तो नहीं किया गया।
साइबर ठगी का बढ़ता खतरा, चिंता में शिक्षक
छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच यह मामला और गंभीर हो जाता है। साइबर ठग अब केवल अनजान लोगों को फोन करने तक सीमित नहीं हैं। वे किसी व्यक्ति की नौकरी, पद, संस्था या निजी परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी का सहारा लेकर उसे भरोसे में लेने अथवा डराने की कोशिश कर सकते हैं। संघ ने दावा किया है कि प्रदेश में साइबर ठगी के कारण बड़ी संख्या में लोग आर्थिक नुकसान उठा चुके हैं। राज्य और राजधानी रायपुर से जुड़े मामलों में ठगी की रकम तथा दर्ज प्रकरणों के सटीक आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। फिर भी शिक्षकों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें बताती हैं कि डिजिटल सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
जांच नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर शिक्षक वर्ग में नाराजगी बढ़ रही है। शालेय शिक्षक संघ ने मांग की है कि संदिग्ध कॉल्स की जांच कराई जाए, शिक्षकों के डेटा के संभावित दुरुपयोग के स्रोत का पता लगाया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और शिक्षकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकता है। संघ के प्रांतीय मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि बढ़ते साइबर अपराधों के दौर में सरकारी व्यवस्था से जुड़े डेटा की सुरक्षा बेहद अहम है। यदि शिक्षकों की जानकारी का उपयोग उन्हें डराने और ठगी की कोशिश करने के लिए हो रहा है, तो यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का मामला है।