
शिलांग। मेघालय की राजधानी शिलांग में अपनी मांगों को लेकर निकाली गई छात्रों की बाइक रैली उस वक्त हिंसक हो गई, जब प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में वाहनों को निशाना बनाया गया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इस दौरान स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं को भी क्षतिग्रस्त किए जाने की खबर है। रैली का आयोजन खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) की ओर से किया गया था। संगठन लंबे समय से अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बना रहा है। बुधवार को काले झंडों के साथ निकली बाइक और साइकिल रैली शहर के विभिन्न इलाकों से होते हुए सचिवालय की ओर बढ़ी।
प्रदर्शन के बीच अचानक बिगड़े हालात
शुरुआत में रैली विरोध प्रदर्शन के रूप में आगे बढ़ रही थी, लेकिन बाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कई जगहों पर वाहनों में तोड़फोड़ की गई और कम से कम दो सरकारी वाहनों में आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने के बाद पुलिस को हालात संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। सबसे ज्यादा चिंता उस वक्त बढ़ी, जब राहत एवं पुनर्वास कॉलोनी क्षेत्र में स्थापित स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया। प्रतिमाओं के साथ हुई तोड़फोड़ ने इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया।
पांच मांगों को लेकर सड़क पर उतरा KSU
KSU का कहना है कि उसने राज्य सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया था। संगठन के मुताबिक, तय समयसीमा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाने के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाया गया। हाल के दिनों में KSU ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और विरोध प्रदर्शन भी किए थे। संगठन की मांगों में स्थानीय लोगों के हितों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई है।
क्या हैं KSU की प्रमुख मांगें?
- Meghalaya Residents Safety and Security Act (MRSSA) को लागू करने की मांग।
- MPSC और District Selection Committees (DSC) की भर्ती प्रक्रिया में सुधार।
- प्रवासी श्रमिकों से जुड़े नियमों को ज्यादा प्रभावी और सख्त बनाने की मांग।
- NEIGRIHMS में नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव।
- पूर्वी जयंतिया हिल्स के लुम सिरमन में प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना से संबंधित जन सुनवाई को रद्द करने की मांग।
सरकार पर बढ़ रहा दबाव
KSU ने पहले ही संकेत दिया था कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर दी गई समयसीमा अगस्त के मध्य में खत्म हुई थी, जिसके बाद शिलांग में यह बाइक रैली आयोजित की गई। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने से आंदोलन का मूल मुद्दा पीछे छूटता नजर आया।
तीन छात्र नेताओं की गिरफ्तारी
हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रैली के दौरान हुई हिंसा में कथित भूमिका के आरोप में तीन छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। फिलहाल, शिलांग में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस की मौजूदगी के बीच हालात पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है, एक तरफ प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत का रास्ता तलाशना और दूसरी तरफ हिंसा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई करना। शिलांग की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई मांगों का विरोध हिंसा और तोड़फोड़ तक क्यों पहुंचा ?