• राजनीतिक संरक्षण और सिंडिकेट के डर से असली दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने से कतरा रहा प्रशासन।

 

  •  कवर्धा में बैगा आदिवासियों से अवैध वसूली की शिकायत, विभाग की नीयत और कार्रवाई के तरीके पर उठे गंभीर सवाल।

छत्तीसगढ़ के शराब ठेकों में ओवररेटिंग और अवैध वसूली का खुला खेल बेखौफ चल रहा है। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीमों ने जब दुर्ग, कांकेर और सरगुजा में औचक निरीक्षण किया, तो ग्राहकों से तय कीमत से ज्यादा पैसे ऐंठने का भंडाफोड़ हुआ।

​इस खुलासे के बाद आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने 3 उप निरीक्षकों (एसआई) को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही 2 जिला आबकारी अधिकारियों और 3 सहायक आबकारी अधिकारियों को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर विभाग प्रमुख किसके दबाव में हैं?

​सिंडिकेट का खौफ: सफेदपोशों को किसका संरक्षण?

आबकारी विभाग ने महज आठ दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। लेकिन हर बार सिर्फ छोटे कर्मचारियों और एसआई पर ही निलंबन की गाज क्यों गिर रही है? दुर्ग के अंजोरा और सरगुजा की बौरीपारा दुकान में 80 से 100 रुपए तक की अतिरिक्त वसूली हो रही थी।

​दुकानों का संचालन करने वाले और इस काली कमाई से करोड़ों का मुनाफा काटने वाले असली रसूखदारों पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इन ठेकेदारों और मुख्य आरोपियों को सत्ता के गलियारों में बैठे कुछ बड़े नेताओं और रसूखदार नौकरशाहों का सीधा संरक्षण प्राप्त है। इसी राजनीतिक खौफ और सिंडिकेट की ऊंची पहुंच के कारण विभाग प्रमुख इन पर सीधे हाथ डालने से बच रहे हैं।

​इन अधिकारियों पर हुई निलंबन और कागजी कार्रवाई

कार्रवाई के नाम पर अंबिकापुर की बौरीपारा दुकान में एसआई अनिल गुप्ता को निलंबित किया गया है। वहीं, भानुप्रतापपुर (कांकेर) में बीयर पर 10 रुपए ज्यादा लेने के आरोप में एसआई ओम प्रकाश और दुर्ग के अंजोरा में एसआई हरीश पटेल पर निलंबन की गाज गिरी है।

​इनके अलावा पांच बड़े अफसरों को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति कर ली गई है। इन अफसरों में जिला आबकारी अधिकारी सीआर साहू (दुर्ग) और लक्ष्मीकांत गायकवाड़ (सरगुजा) शामिल हैं। इसके साथ ही सहायक आबकारी अधिकारी धीरज कनौजिया, मधुकर श्याम हरित (कांकेर) और शीला बड़ा (सरगुजा) से भी सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा गया है।

​कवर्धा में बैगा आदिवासियों पर जुल्म, यहां भी कार्रवाई शून्य

शराब दुकानों में चल रही इस लूट-खसोट के बीच कवर्धा से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां आबकारी विभाग के अधिकारी विशेष संरक्षित बैगा आदिवासियों को अपना आसान 'टारगेट' बना रहे हैं।

​छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने आबकारी आयुक्त से शिकायत कर बताया है कि एसआई रायजादा और एसआई गीता ग्रामीणों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हैं। जेल भेजने का डर दिखाकर इन गरीब ग्रामीणों से 10 से 25 रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही है। परिषद ने प्रताड़ित आदिवासियों की लिस्ट भी सौंप दी है, लेकिन उच्च स्तरीय संरक्षण के चलते यहां भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।