Sleep and Muscle Health: अगर आपको लगता है कि नींद पूरी न होने का असर सिर्फ थकान, सुस्ती या चिड़चिड़ेपन तक ही सीमित है, तो ऐसा नहीं है. लगातार कम या खराब नींद शरीर की रिकवरी को भी प्रभावित कर सकती है. इसका असर कुछ लोगों में मांसपेशियों में दर्द, तनाव और सुबह उठने पर अकड़न के रूप में नजर आ सकता है.

खासकर जिन लोगों की नींद बार-बार टूटती है या जो रोज देर रात तक जागते हैं, उन्हें अगले दिन गर्दन, कंधों, पीठ या शरीर के दूसरे हिस्सों में भारीपन और जकड़न महसूस हो सकती है. हालांकि, मांसपेशियों के दर्द की वजह सिर्फ नींद की कमी नहीं होती. सोने की गलत पोजिशन, लंबे समय तक बैठे रहना, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव भी इसके कारण हो सकते हैं.

नींद के दौरान शरीर को मिलता है रिकवरी का समय
नींद के दौरान शरीर दिनभर की थकान और शारीरिक तनाव से उबरने की प्रक्रिया में होता है. इस दौरान शरीर के कई जरूरी रिकवरी प्रोसेस सक्रिय रहते हैं और मांसपेशियों व अन्य टिश्यू को आराम मिलने का समय मिलता है. जब कोई व्यक्ति लगातार कम सोता है या उसकी नींद बार-बार टूटती रहती है, तो शरीर की रिकवरी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में कुछ लोगों को सुबह उठने पर मांसपेशियों में खिंचाव, दर्द या अकड़न पहले से ज्यादा महसूस हो सकती है.

बदलती लाइफस्टाइल भी बन रही है वजह
आज की लाइफस्टाइल में नींद का पैटर्न बिगड़ना काफी आम हो गया है. देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाना, काम का दबाव, तनाव और रोज अलग-अलग समय पर सोना नींद की क्वालिटी को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करने वाले लोगों में गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है. अगर इसके साथ पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी भी हो, तो अकड़न और शरीर में असहजता ज्यादा महसूस हो सकती है.

खराब नींद और मांसपेशियों का दर्द कैसे बन सकता है चक्र?
नींद और मांसपेशियों की तकलीफ एक-दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं. अगर शरीर में दर्द या अकड़न है, तो आराम से सोना मुश्किल हो सकता है. वहीं, पर्याप्त नींद न मिलने पर अगले दिन व्यक्ति को दर्द और असहजता ज्यादा महसूस हो सकती है. इस तरह दर्द की वजह से नींद खराब होना और खराब नींद की वजह से शरीर में तकलीफ बढ़ना एक तरह का चक्र बना सकता है. इसलिए सिर्फ दर्द पर ध्यान देने के बजाय नींद, शारीरिक गतिविधि और रोजमर्रा की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है.

मांसपेशियों की अकड़न कम करने के लिए क्या करें?
अगर सुबह उठने पर हल्की अकड़न या शरीर में भारीपन महसूस होता है, तो कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं.

  • रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें.
  • सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें.
  • दिनभर लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचें.
  • काम के दौरान बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें और शरीर को मूव करें.
  • नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज या शारीरिक गतिविधि करें.
  • सुबह उठने के बाद हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं.
  • सोने की पोजिशन और तकिए की ऊंचाई भी आरामदायक रखें.
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें.

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर मांसपेशियों का दर्द या अकड़न लगातार बनी रहती है, बहुत ज्यादा बढ़ रही है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो इसे केवल नींद की कमी मानकर नजरअंदाज न करें. इसी तरह कमजोरी, सुन्नपन, हाथ-पैर में झनझनाहट या किसी अन्य असामान्य लक्षण के साथ दर्द हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.