जांजगीर-चांपा : स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों को सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल देने की दिशा में अब एक जरूरी पहल हकीकत में होने लगी है। जिन सरकारी स्कूलों में बालिकाओं को अलग शौचालय की सुविधा नहीं होने से रोजाना असुविधा झेलनी पड़ती थी, वहां अब इस समस्या को दूर करने की तैयारी है। जिले में 122 बालिका शौचालयों के निर्माण की योजना बनाई गई है। इसकी पहली कड़ी जनपद पंचायत बलौदा की ग्राम पंचायत बगडबरी में पूरी हो चुकी है। यहां प्राथमिक शाला में जिले का पहला बालिका शौचालय बनकर तैयार हो गया है।

अब तक कई सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए पृथक शौचालय नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था। खासकर छोटी कक्षाओं की बच्चियों के लिए यह समस्या अधिक संवेदनशील थी। कई बार मूलभूत सुविधा के अभाव में छात्राओं को असहज परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना के तहत बालिका शौचालय निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है।

4.30 लाख में तैयार हुआ पहला शौचालय

बगडबरी प्राथमिक शाला में बालिका शौचालय निर्माण के लिए 4 लाख 30 हजार 829 रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। निर्माण पूरा होने के साथ ही स्कूल की छात्राओं को अलग शौचालय की सुविधा मिल गई है। यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि स्कूलों में बालिकाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने की दिशा में जिले की पहली ठोस पहल है।

सुविधा के साथ ग्रामीणों को रोजगार

इस निर्माण की खास बात यह भी रही कि इससे स्थानीय श्रमिकों को रोजगार का अवसर मिला। निर्माण कार्य के दौरान कुल 196 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। तकनीकी सहायक ने निर्माण के लिए ले-आउट तैयार किया, जबकि रोजगार सहायक ने मस्टररोल जारी कर श्रमिकों के माध्यम से काम कराया। इस तरह एक ही पहल से स्कूल की जरूरत पूरी होने के साथ ग्रामीण श्रमिक परिवारों को भी काम मिला।

अब 121 स्कूलों को सुविधा का इंतजार

बगडबरी में जिले का पहला बालिका शौचालय तैयार होने के बाद अब शेष स्कूलों में भी निर्माण की राह खुल गई है। जिले में कुल 122 शौचालय बनाने की पहल की गई है। ऐसे में आने वाले समय में अन्य सरकारी स्कूलों की छात्राओं को भी अलग शौचालय की सुविधा मिलने की उम्मीद है। जरूरत इस बात की है कि निर्माण कार्य समय पर पूरे हों और तैयार सुविधाओं का नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि बेटियों को स्कूल में पढ़ाई के दौरान किसी बुनियादी जरूरत के लिए परेशानी न उठानी पड़े।