
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार और पेंशनर्स के बीच टकराव की आहट तेज हो गई है। प्रदेश के लाखों पेंशनर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन ने साफ कहा है कि यदि वर्षों से लंबित मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो राजधानी रायपुर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा और मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है।
संगठन का दावा है कि प्रदेश के करीब 1 लाख 38 हजार पेंशनर्स लंबे समय से अपनी जायज मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी नाराजगी को लेकर रायपुर में आयोजित बैठक में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों और सदस्यों ने सरकार के खिलाफ रणनीति पर चर्चा की और आंदोलन का संकेत दिया है। 
पेंशनर्स की मांगों में 2 प्रतिशत अंतरिम राहत और एरियर भुगतान, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, आयकर में विशेष छूट, वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स के लिए निःशुल्क तीर्थयात्रा योजना तथा 70 वर्ष की आयु पूरी करने वालों को अतिरिक्त 20 प्रतिशत पेंशन का लाभ शामिल है। संगठन का कहना है कि ये सुविधाएं किसी विशेष अनुग्रह की नहीं बल्कि पेंशनर्स के अधिकारों से जुड़ी मांगें हैं।
प्रदेश अध्यक्ष पी.आर. यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अभी भीषण गर्मी को देखते हुए आंदोलन की तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो राजधानी में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर मांगों के तत्काल निराकरण की मांग की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार पेंशनर्स की मांगों पर समय रहते फैसला लेगी या फिर राजधानी की सड़कों पर हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी आवाज बुलंद करते नजर आएंगे। फिलहाल, पेंशनर्स संगठन ने सरकार को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इंतजार की सीमा अब खत्म होने लगी है।