
रायपुर। सूबे के सत्ता और नौकरशाही के गलियारों में इन दिनों कई दिलचस्प चर्चाएं तैर रही हैं। कहीं विदेशी धरती पर डूबे निवेश का मातम है, तो कहीं राजधानी के जिम में 'टेंडर' वाली वर्जिश हो रही है। आइए डालते हैं इनसाइडर चर्चा पर एक नजर:
दुबई में फंसा पैसा, उड़ी रातों की नींद
ईरान-इजरायल तनाव का साइड इफेक्ट सीधे छत्तीसगढ़ के सत्ता-गलियारों में दिख रहा है। चर्चा है कि दुबई की चरमराती अर्थव्यवस्था ने यहां के कई माननीयों और साहबों (रिटायर्ड व सेवारत) की नींद उड़ा दी है। खबर है कि वहां पूंजी लगाने वालों में भाजपा-कांग्रेस दोनों के नेता और कई अफसर शामिल हैं। पूर्व सरकार में रसूखदार रहे कुछ नेताओं के दुबई वाले होटलों और धंधों की हवा निकल गई है। बड़े लोगों का बड़ा इन्वेस्टमेंट, अब नुकसान भी तगड़ा हुआ है, तो रातों की नींद उड़ना लाजमी है।
लेवी का खेल और नया नान
धान के कटोरे में कस्टम मिलिंग और लेवी फिर से हॉट टॉपिक है। सुना है रेट 10 रुपये से दोगुना हो गया है और हिस्सेदार भी बढ़ गए हैं। ईडी-सीबीआई की तिरछी नजर के डर से मिलरों ने सीधे चढ़ावा चढ़ाना बंद कर दिया है; अब यह 'पवित्र' जिम्मा जिले के अफसरों के सुपुर्द है। साय सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के बीच लोग दुआ कर रहे हैं कि राज्य में कोई नया 'नान घोटाला' न पक जाए।
दक्षिण का तेज और तुनकमिजाज अफसर
जंगल महकमे में आजकल एक अफसर की तुनकमिजाजी के खूब चर्चे हैं। साहब न मंत्री की सुनते हैं, न संतरी की। इस तेज का राज उनकी कुर्सी नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के एक राज्य में उनके पिता की हैसियत है। पिता सत्ताधारी पार्टी के कोषाध्यक्ष जो ठहरे! अब पार्टी के कोष की चमक तो बेटे के चेहरे पर आयातित होकर दिखेगी ही।
जिम या नेटवर्किंग सेंटर ?
राजधानी का एक हाई-प्रोफाइल जिम आजकल खुफिया रडार पर है। बड़े साहब लोग अपने महंगे क्लब और सोसायटियों के आलीशान जिम छोड़कर यहीं पसीना बहाने क्यों आ रहे हैं? असल में यह जिम एक नेटवर्किंग प्लेस बन चुका है। यहां बेंच प्रेस करते हुए टेंडर पास होते हैं और वजन बढ़ाने के बहाने कमीशन के किलो तय होते हैं। क्या मालूम सरकार की तफ्तीश में यहां से कितने किस्से बाहर आ जाएं!
गायब होते जंगल: मैं हूं कहां?
गरियाबंद से लेकर बस्तर तक कटते जंगल चीख-चीख कर पूछ रहे हैं- 'मैं हूं कहां?' कागजों पर एक दशक में एक अरब पेड़ लग गए, लेकिन हकीकत में 1 लाख पेड़ कट चुके हैं और ठूंठ बिछे हैं। अफसर कुर्सी की लड़ाई में व्यस्त हैं और हरियाली के दावों को धता बताते हुए प्रदेश के शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों में शुमार हो रहे हैं। खैर, फाइलों में तो जंगल बढ़ ही रहा है!
डीजीपी पर सस्पेंस और सुप्रीम कोर्ट का डंडा
सूबे में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति न जाने किस अड़चन में फंसी है। अरुण देव गौतम और हिमांशु गुप्ता के यूपीएससी पैनल पर धूल जम रही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने डंडा चलाया है और 19 मई 2026 को पेशी मुकर्रर है। चर्चा है कि एक साल पुराने पैनल की मियाद खत्म हो रही है, तो क्या सरकार नया पैनल भेजेगी या 19 से पहले ही किसी एक नाम पर मुहर लगाकर सुप्रीम कोर्ट की जिरह से बचेगी? 'लॉ एंड ऑर्डर' की दुहाई देने वाली सरकार को अब झट से फैसला ले लेना चाहिए, क्योंकि फैसले न ले पाना सबसे बड़ी कमजोरी मानी जाती है।