रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस को जल्द ही अपना नया पूर्णकालिक मुखिया मिल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट और संघ लोक सेवा आयोग की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने फैसला ले लिया है। मौजूदा प्रभारी डीजीपी अरुण देव गौतम के नाम पर सरकार ने मुहर लगा दी है। अब वह राज्य के पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक होंगे। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस की समय सीमा खत्म हो चुकी है। ऐसे में पूरी संभावना है कि आज कोर्ट खुलने से पहले ही सरकार उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दे।

इस अहम पद की दौड़ में आईपीएस अधिकारी हिमांशु गुप्ता का नाम भी शामिल था। लेकिन हाल ही में नक्सल मोर्चे पर पुलिस को मिली बड़ी कामयाबियों ने अरुण देव गौतम का दावा मजबूत कर दिया। सरकार भी इस बात को लेकर उलझन में थी कि सफलता के इस दौर में बदलाव किया जाए या नहीं। अंततः अरुण देव गौतम का पलड़ा भारी रहा और उनके नाम पर सहमति बन गई।

यूपीएससी और सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया था सख्त रुख

दरअसल सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद संघ लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा था। आयोग ने पत्र लिखकर पूछा था कि अब तक राज्य में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा चार फरवरी 2025 को रिटायर हो गए थे। इसके बाद से राज्य सरकार ने अरुण देव गौतम को प्रभारी डीजीपी बना रखा था।

यूपीएससी ने 13 मई 2025 को ही डीजीपी पद के लिए दो आईपीएस अफसरों का पैनल राज्य सरकार को भेज दिया था। इस पैनल में 1992 बैच के अरुण देव गौतम और 1994 बैच के हिमांशु गुप्ता का नाम था। आमतौर पर आयोग तीन नाम भेजता है लेकिन सीनियर अफसरों के विकल्प न होने के कारण सिर्फ दो नाम भेजे गए थे। नियम के मुताबिक सरकार को इन्हीं में से किसी एक को पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त करना था।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में साफ आदेश दिया था कि राज्यों में प्रभारी डीजीपी बनाने की परंपरा नहीं चलेगी। इसके बावजूद नियुक्ति में देरी हुई। बीते पांच फरवरी 2026 को टी धंगोपल राव बनाम यूपीएससी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ चेतावनी दी थी कि नियुक्ति में देरी हुई तो जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होगी। इसी दबाव के चलते अब सरकार तुरंत आदेश निकालने की तैयारी में है।

जानिए कौन हैं आईपीएस अरुण देव गौतम

अरुण देव गौतम 1992 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनका जन्म दो जुलाई 1967 को कानपुर के अभयपुर गांव में हुआ था। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद से बारहवीं की। इसके बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में एमए किया। बाद में दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की।

चुनौतीपूर्ण इलाकों में काम करने का लंबा अनुभव

आईपीएस बनने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला था। साल 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया। वह कोरिया रायगढ़ जशपुर राजनांदगांव सरगुजा और बिलासपुर जैसे अहम जिलों के एसपी रहे हैं। सरकार ने हमेशा उन्हें चुनौतीपूर्ण इलाकों में भेजा।

साल 2009 में राजनांदगांव में हुए बड़े नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां का एसपी बनाकर भेजा गया था जहां उन्होंने नक्सलियों का कड़ा मुकाबला किया। इसी तरह साल 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सली हमले के बाद उन्हें बस्तर का आईजी बनाया गया था। उनकी देखरेख में वहां विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए थे और बंपर वोटिंग हुई थी।

अरुण देव गौतम को उनके शानदार काम के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। साल 2010 में उन्हें सराहनीय सेवा के लिए भारतीय पुलिस पदक और 2018 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला। साल 2002 में कोसोवा में सेवा देने के लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।