मस्तूरी। ऐतिहासिक नगरी मल्हार में आयोजित होने वाला मल्हार महोत्सव इस बार अपनी भव्यता और सांस्कृतिक छटा के बजाय सियासी उठापटक और विवादों के लिए ज्यादा सुर्खियों में है। आयोजन को लेकर मस्तूरी भाजपा के भीतर मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है। कुछ दिन पहले ही इसी कार्यक्रम की रूपरेखा तय करते समय नगर पंचायत में सरेआम थप्पड़बाजी हुई थी और अब एक नया राजनीतिक कारनामा सामने आ गया है। प्रशासन और आयोजन समिति ने महोत्सव के आमंत्रण पत्र से मस्तूरी के कद्दावर नेता और पूर्व स्वास्थ्य व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ कृष्णमूर्ति बांधी का नाम ही गायब कर दिया है। इस बड़ी अनदेखी से भाजपा कार्यकर्ताओं और बांधी समर्थकों में भारी उबाल है। लोग इसे महज एक साधारण प्रशासनिक भूल मानने को तैयार नहीं हैं बल्कि इसे एक सोची समझी राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

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सियासत में अक्सर लोगों की याददाश्त कमजोर हो जाती है लेकिन मल्हार के मामले में तो अधिकारी और पार्टी के कुछ नेता अपना इतिहास ही भूल बैठे हैं। डॉ बांधी वही नेता हैं जिन्होंने अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान पूरी ताकत लगाकर मल्हार को नगर पंचायत का अहम दर्जा दिलाया था। इतना ही नहीं जिस मल्हार महोत्सव के मंच पर आज कई नेता अपनी कुर्सी पक्की करने और फोटो खिंचवाने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं उस भव्य आयोजन की नींव भी डॉ बांधी के ही विशेष प्रयासों से रखी गई थी। वर्तमान में मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में छाया विधायक के रूप में अपनी मजबूत पैठ रखने वाले ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि को कार्ड से बाहर रखकर आयोजन समिति ने अपनी लचर कार्यप्रणाली की पोल खुद ही खोल दी है।

जिस राजनेता का मल्हार के विकास से इतना गहरा और सीधा जुड़ाव रहा हो उसे ही किनारे कर देना अनुशासित कही जाने वाली भाजपा के भीतर चल रही भयंकर गुटबाजी का जीता जागता प्रमाण है।

मस्तूरी की सियासत की नब्ज पहचानने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि यह खेल अचानक या गलती से नहीं हुआ है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि एक जिला स्तरीय पदाधिकारी मस्तूरी का पूरा सियासी माहौल बिगाड़ने में लगा हुआ है। इस पदाधिकारी की बेजा दखलंदाजी के चलते स्थानीय और पुराने कार्यकर्ताओं में गहरी हताशा है। एक तरफ पार्टी अनुशासन की बात करती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आपसी खींचतान और वर्चस्व की लड़ाई में पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं का सरेआम अपमान किया जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्थानीय अधिकारी किसी खास गुट या नेता के भारी दबाव में काम कर रहे हैं। अतिथि सूची तैयार करते समय क्या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि इसमें क्षेत्र के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय चेहरे का नाम ही शामिल नहीं है।

मल्हार महोत्सव का यह पूरा आयोजन शुरू से ही विवादों के साए में घिरा हुआ है। चंद रोज पहले ही आयोजन से जुड़ी एक अहम बैठक के दौरान एक पदाधिकारी द्वारा नगर पंचायत अध्यक्ष को सबके सामने थप्पड़ जड़ देने की शर्मनाक घटना ने पूरे बिलासपुर जिले में हड़कंप मचा दिया था। उस गंभीर विवाद की आंच अभी ठीक से ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब यह कार्ड से नाम गायब करने का नया कांड सामने आ गया। यह सब तब हो रहा है जब पूरे महो उत्सव का आयोजन प्रशासनिक अधिकारियों के सीधे मार्गदर्शन और कड़ी निगरानी में किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और निष्पक्षता पर भी बड़े सवालिया निशान लग गए हैं।

अब पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा का प्रदेश और जिला संगठन इस भारी और शर्मनाक चूक पर क्या एक्शन लेता है। क्या हमेशा की तरह सिर्फ रस्म अदायगी के लिए कोई गोलमोल जांच होगी या उन चेहरों पर कोई सख्त कार्रवाई की जाएगी जो मस्तूरी में पार्टी का बेड़ा गर्क करने पर तुले हुए हैं। फिलहाल तो मल्हार महोत्सव का आगाज होने से पहले ही मस्तूरी की सियासत पूरी तरह से गरमा चुकी है और उपेक्षित कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

और सवाल ये भी उठ रहा है कि सीनियर नेता की अनदेखी के बाद क्या केंद्रीय मंत्री तोखन साहू और सूबे के उप मुख्यमंत्री अरुण साव कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।

 

कार्यक्रम व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है यह चूक प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई है। उन्हें क्षेत्र के नेताओं और सीनियर नेताओं को नजर अंदाज नहीं करना था 
 
मोहित जायसवाल 
जिला अध्यक्ष भाजपा ग्रामीण.

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