बिलासपुर : शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का लालच ऐसा जाल बन गया कि निवेशक अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठे हैं। साइबर ठगों ने फर्जी ट्रेडिंग एप और सेबी में रजिस्टर्ड होने का भरोसा दिलाकर बिलासपुर के दो लोगों को 15.20 लाख रुपए का चूना लगा दिया। ठगों ने एक पीड़ित के खाते में पांच महीने तक लाखों रुपए का काल्पनिक मुनाफा दिखाया। जब स्क्रीन पर रकम 19.85 लाख रुपए तक पहुंची तो पीड़ित को लगा कि उसकी किस्मत चमक गई है, लेकिन असली झटका तब लगा जब रकम निकालने की कोशिश की। निकासी रोक दी गई और 15 दिन में सेटलमेंट का भरोसा देने वाले ठग फोन बंद कर गायब हो गए। दूसरे मामले में सीए फाइनल के छात्र को ट्रेडिंग टिप्स और प्रीमियम सर्विस के नाम पर 8 लाख रुपए की चपत लगाई गई।

5 हजार से शुरू कराया निवेश, फिर 99 हजार तक की कराई किस्तें जमा

सरकंडा के अशोक विहार चांटीडीह निवासी अश्वनी एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं। 25 दिसंबर 2025 को उनके मोबाइल पर श्रिया यादव नाम की महिला का फोन आया। उसने शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का भरोसा दिलाया और एक ट्रेडिंग एप डाउनलोड करवाया। शुरुआत में कम रकम निवेश करने की सलाह दी गई। अश्वनी ने पहली बार पांच हजार रुपए लगाए। एप पर निवेश बढ़ता दिखाई देने लगा तो उनका भरोसा भी मजबूत होता गया। इसके बाद दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच उनसे 12 किस्तों में कुल 7.20 लाख रुपए जमा कराए गए। रकम अभिषेक कुमार और अविनाश कुमार के यूपीआई आईडी पर ट्रांसफर कराई गई। शुरुआत छोटी रकम से हुई थी, लेकिन बाद में 99 हजार रुपए तक की किस्तें जमा कराई गई। इस दौरान फर्जी एप पर उनकी निवेश राशि और मुनाफा लगातार बढ़ता दिखाया जाता रहा। देखते ही देखते स्क्रीन पर बैलेंस 19.85 लाख रुपए पहुंच गया।

मुनाफा निकलते समय निकासी की रोक दी प्रक्रिया

अश्वनी ने जब अपनी रकम निकालनी चाही तो एप में निकासी की प्रक्रिया रोक दी गई। आरोपियों ने 15 दिन के भीतर सेटलमेंट करने का भरोसा दिया। पीड़ित इंतजार करता रहा, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी रकम नहीं मिली। दोबारा संपर्क करने की कोशिश की तो आरोपियों के मोबाइल नंबर बंद मिले। जिस कार्यालय का पता बताया गया था, वह भी फर्जी निकला। तब पीड़ित को समझ आया कि ट्रेडिंग के नाम पर उसके साथ सुनियोजित साइबर ठगी हुई है।

सेबी रजिस्टर्ड बताकर छात्र को प्लैटिनम प्लान में फंसाया

ठगी का दूसरा मामला तोरवा क्षेत्र का है। यहां सीए फाइनल के छात्र वुगराला राव को शेयर ट्रेडिंग टिप्स और प्रीमियम सर्विस देने के नाम पर निशाना बनाया गया। 21 सितंबर को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को सेबी रजिस्टर्ड बताते हुए ट्रेडिंग में बेहतर कमाई कराने का दावा किया। उसने सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम नाम से तीन प्लान बताए। ज्यादा लाभ की उम्मीद में छात्र ने प्लैटिनम प्लान चुन लिया। इसके बाद 22 सितंबर से 20 अक्टूबर के बीच अलग-अलग किस्तों में 14 बार ऑनलाइन भुगतान कराया गया। इस तरह छात्र से कुल 8 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। रकम लेने के बाद न तो वादा की गई सर्विस मिली और न ही पैसे वापस किए गए। लगातार टालमटोल और रकम लौटाने से इनकार किए जाने पर छात्र ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। गुरुवार को तोरवा पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्क्रीन पर लाखों का मुनाफा, हकीकत में खाली हाथ

दोनों मामलों में ठगी का तरीका अलग-अलग था, लेकिन भरोसा जीतने के लिए शेयर बाजार में कम समय में मोटा मुनाफा को हथियार बनाया गया। एक मामले में फर्जी एप पर फर्जी बैलेंस बढ़ाकर निवेशक को लगातार पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया गया, तो दूसरे में सेबी रजिस्टर्ड होने का दावा कर प्रीमियम ट्रेडिंग सर्विस के नाम पर रकम वसूली गई।