Indore-Daund Express News: ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को आराम और साफ-सफाई की उम्मीद होती है, लेकिन इंदौर-दौंड एक्सप्रेस (22944) में यात्रियों के सामने कुछ ऐसा आया जिसने रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। एक ही दिन ट्रेन के फर्स्ट एसी से लेकर स्लीपर कोच तक चूहे और कॉकरोच होने की शिकायत सामने आई। फर्स्ट एसी में 5 महीने की बच्ची के साथ सफर कर रही एक महिला ने चूहों से परेशान होकर एसी डक्ट के रास्ते को बेडशीट से बंद करने की कोशिश की, जबकि स्लीपर कोच के यात्री ने कॉकरोच का वीडियो बनाकर रेलवे अधिकारियों से शिकायत की।

16 घंटे के सफर में बार-बार निकलते रहे चूहे
फर्स्ट एसी कोच में अपनी 5 महीने की बच्ची के साथ यात्रा कर रहीं एकता दुबे के मुताबिक, करीब 16 घंटे के सफर के दौरान एसी डक्ट वाले हिस्से से चूहे बार-बार बाहर आते-जाते रहे। चूहों की आवाजाही से यात्रियों के लिए कोच में आराम करना मुश्किल हो गया। एकता ने कोच में कॉकरोच होने की शिकायत भी की। सबसे ज्यादा चिंता उन्हें अपनी छोटी बच्ची की सुरक्षा को लेकर रही। स्थिति से परेशान होकर उन्होंने एसी डक्ट के हिस्से में बेडशीट घुसाकर चूहों के आने का रास्ता रोकने की कोशिश की। उनका सवाल था कि अगर कोच में चूहे और कॉकरोच मौजूद थे तो उसे यात्रियों के लिए सेवा में कैसे भेजा गया?

मां का सवाल- कोच को क्लियरेंस किसने दिया?
यात्री एकता दुबे ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ट्रेन के कोच को चलाने से पहले उसकी सफाई और पेस्ट कंट्रोल की जांच किस स्तर पर की जाती है। उनका कहना था कि फर्स्ट एसी जैसे कोच में यात्रा करने के लिए यात्री अतिरिक्त किराया देते हैं। ऐसे में वहां चूहों और कॉकरोच की मौजूदगी यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ स्वच्छता व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

Sleeper Coach में भी दिखे कॉकरोच, यात्री ने बनाया वीडियो
मामला सिर्फ फर्स्ट एसी तक सीमित नहीं रहा। इसी ट्रेन में उज्जैन से सवार हुए एक अन्य यात्री ने स्लीपर कोच में कॉकरोच घूमते हुए देखे। यात्री ने इसका वीडियो रिकॉर्ड किया और शिकायत के साथ डीआरएम रतलाम को भेजा। एक ही ट्रेन के अलग-अलग कोचों से सामने आई शिकायतों के बाद रेलवे की सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।कोच में यात्री गेप में इस तरह बेड शीट घुसाकर कर रहे बचाव।

शिकायत के बाद रेलवे ने दिए जांच के निर्देश
यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीआरएम अश्वनी कुमार ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई और व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए हैं।रेलवे की ओर से ट्रेनों में स्वच्छता और पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था को लेकर पहले भी कई स्तरों पर निगरानी की जाती रही है। लेकिन यात्रियों की ताजा शिकायतों ने इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले भी सामने आ चुका है चूहे के काटने का मामला
ट्रेन में चूहों की मौजूदगी का मामला नया नहीं है। हाल ही में ऊना-इंदौर एक्सप्रेस में एक बुजुर्ग यात्री की नाक चूहे द्वारा कुतरे जाने की घटना सामने आई थी। घटना के बाद रेलवे की यात्री सुविधाओं, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। इसके बाद रतलाम मंडल ने ट्रेनों के रखरखाव के दौरान सफाई के साथ पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल पर विशेष निगरानी की बात कही थी।

इंदौर और महू डिपो में पेस्ट कंट्रोल पर निगरानी का दावा
रतलाम मंडल के अनुसार, इंदौर और महू कोचिंग डिपो में ट्रेनों के रैक के प्राइमरी और सेकंडरी मेंटेनेंस के दौरान साफ-सफाई के साथ पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रेलवे स्टाफ और संबंधित कॉन्ट्रैक्टर को भी लापरवाही मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में फर्स्ट एसी और स्लीपर दोनों कोचों से चूहे-कॉकरोच की शिकायत सामने आना व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़ा करता है।

अब सवाल सफाई व्यवस्था पर नहीं, जवाबदेही पर भी
एक तरफ रेलवे ट्रेनों में स्वच्छता और पेस्ट कंट्रोल की नियमित व्यवस्था का दावा करता है, दूसरी तरफ यात्रियों को चलती ट्रेन में चूहों और कॉकरोच का सामना करना पड़ रहा है। खासकर 5 महीने की बच्ची के साथ यात्रा कर रही मां को चूहों से बचाने के लिए एसी डक्ट बंद करने के लिए बेडशीट का सहारा लेना पड़ा, यह तस्वीर व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाती है। अब देखने वाली बात होगी कि रेलवे इन शिकायतों की जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में यात्रियों को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।