बिलासपुर : भर्ती विज्ञापन में जब वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति का स्पष्ट प्रावधान हो तो नियोक्ता बाद में अपनी ही शर्तों से मुकर नहीं सकता। चयन सूची जारी होने के एक साल के अंदर किसी चयनित अभ्यर्थी के इस्तीफा देने या अन्य कारण से पद खाली होने पर वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार को नियुक्ति का मौका देना होगा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राजनांदगांव के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने एसटी वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर रहे चंद्रशेखर कंवर को सहायक ग्रेड-तीन के पद पर नियुक्ति देने के सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है।

अपनी शर्तों से पीछे नहीं हट सकता विभाग

चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भर्ती विज्ञापन में एक साल के भीतर पद रिक्त होने पर प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति का प्रावधान खुद नियोक्ता ने किया था। ऐसे में बाद में यह कहकर नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता कि रिक्त पद को नई भर्ती के जरिए भरा जाएगा। कोर्ट के अनुसार प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर मौजूद अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए विचार से बाहर करना मनमाना होगा।

कौशल परीक्षा में रहे पहले, वेटिंग लिस्ट में भी नंबर वन

मामला राजनांदगांव जिला न्यायालय में वर्ष 2023 में हुई भर्ती से जुड़ा है। जिला न्यायालय ने 28 जून 2023 को विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें सहायक ग्रेड-तीन के नौ पद शामिल थे, जिनमें दो पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। रायपुर निवासी चंद्रशेखर कंवर ने एसटी वर्ग से आवेदन किया। कौशल परीक्षा में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया और अंतिम चयन सूची में एसटी वर्ग की प्रतीक्षा सूची में भी उनका नाम सबसे ऊपर था।

चयनित अभ्यर्थी ने इस्तीफा दिया, फिर भी नहीं मिला मौका

इस बीच सहायक ग्रेड-तीन के पद पर चयनित अभ्यर्थी ने चयन सूची जारी होने के एक साल के भीतर इस्तीफा दे दिया। इससे पद रिक्त हो गया। विज्ञापन की शर्तों के मुताबिक इस स्थिति में प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति का रास्ता खुलता था। चंद्रशेखर कंवर ने रिक्त पद पर नियुक्ति की मांग की, लेकिन जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यह कहते हुए उनका दावा खारिज कर दिया कि पद को नई भर्ती के जरिए भरा जाएगा। इसके बाद कंवर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सिंगल बेंच ने 25 जून 2025 को उनकी याचिका स्वीकार करते हुए छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति देने का निर्देश दिया। इस फैसले को चुनौती देते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की।

हाई कोर्ट ने नहीं मानी जिला न्यायाधीश की दलील

अपील में जिला न्यायाधीश की ओर से तर्क दिया गया कि चयनित अभ्यर्थी के पदभार ग्रहण करने के बाद इस्तीफा देने मात्र से प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवार को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। रिक्त पद को भरने के लिए नई भर्ती की जानी चाहिए। डिवीजन बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि विज्ञापन में साफ उल्लेख था कि चयन सूची जारी होने के एक साल के भीतर चयनित अभ्यर्थी इस्तीफा देता है, उसे पद से हटा दिया जाता है अथवा मृत्यु या किसी अन्य कारण से पद खाली होता है तो प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति की जा सकती है।

विज्ञापन की शर्तों का पालन करना अनिवार्य

कोर्ट ने माना कि जब विभाग ने खुद भर्ती प्रक्रिया में ऐसी शर्त रखी है तो बाद में उससे पीछे हटने की छूट नहीं दी जा सकती। प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर मौजूद अभ्यर्थी को नजरअंदाज कर नई भर्ती का रास्ता अपनाना उचित नहीं होगा। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और जिला न्यायाधीश की अपील खारिज कर दी। साथ ही 7 अगस्त 2025 को जारी अंतरिम आदेश भी निरस्त कर दिया।