
नई दिल्ली। भारत में पोषण से जुड़ी समस्या अब केवल कम खाना या कुपोषण तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती दिनचर्या, खान-पान में असंतुलन और पर्याप्त माइक्रोन्यूट्रिएंट्स न मिलने की वजह से कई लोगों में विटामिन और मिनरल्स की कमी देखने को मिल रही है। इनमें विटामिन B12 और विटामिन D की कमी विशेष रूप से चर्चा में रहती है। अलग-अलग अध्ययनों में भारतीय आबादी के विभिन्न समूहों में इन दोनों पोषक तत्वों का स्तर कम पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन कमियों की व्यापकता हर अध्ययन, आयु वर्ग और आबादी के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए केवल किसी एक आंकड़े के आधार पर पूरे देश की आबादी के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
Vitamin B12 की कमी क्यों हो सकती है?
विटामिन B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, DNA सिंथेसिस और नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी कई कारणों से हो सकती है। खासकर लंबे समय तक पर्याप्त B12 युक्त खाद्य पदार्थ न लेने वाले लोगों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। शाकाहारी या पूरी तरह प्लांट-बेस्ड डाइट लेने वाले लोगों को अपने B12 सेवन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत हो सकती है, क्योंकि प्राकृतिक रूप से B12 मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। B12 की कमी होने पर लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, हाथ-पैर में झनझनाहट, ध्यान लगाने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर या लंबे समय तक बनी कमी एनीमिया और तंत्रिका संबंधी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।
Vitamin D की कमी से हड्डियों पर असर
विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों व मांसपेशियों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में पर्याप्त धूप उपलब्ध होने के बावजूद कई लोगों में विटामिन D का स्तर कम पाया जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे दिन का अधिकतर समय घर या ऑफिस के अंदर बिताना, धूप में कम निकलना, शरीर को ज्यादा ढककर रखना और भोजन से पर्याप्त विटामिन D न मिलना। इसकी कमी कुछ लोगों में हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है। एक भारतीय मेटा-एनालिसिस में विटामिन D की कमी की व्यापकता करीब 61% और विटामिन B12 की कमी करीब 53% बताई गई थी। हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों में इस्तेमाल किए गए मानकों और अध्ययन समूहों के कारण आंकड़ों में काफी अंतर देखा जा सकता है।
सिर्फ थकान को देखकर न मान लें विटामिन की कमी
थकान, कमजोरी या शरीर में दर्द जैसे लक्षण कई दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से विटामिन B12 या D की कमी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। अगर ऐसे लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सप्लीमेंट या उपचार की जरूरत तय करना बेहतर रहता है।
डाइट और लाइफस्टाइल पर दें ध्यान
विटामिन B12 के लिए दूध, दही, अंडे, मछली और अन्य B12 युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल किया जा सकता है। पूरी तरह शाकाहारी लोगों के लिए फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंट की जरूरत डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार तय की जा सकती है।
विटामिन D के लिए सुरक्षित तरीके से धूप लेना और डाइट में इसके स्रोत शामिल करना मददगार हो सकता है। अगर शरीर में कमी की पुष्टि हो जाए, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है। बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के हाई-डोज सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
कुल मिलाकर, विटामिन B12 और D की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संतुलित आहार, उचित धूप, जरूरत पड़ने पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह के जरिए इन पोषक तत्वों के स्तर को बेहतर बनाए रखने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।