बिलासपुर। भ्रष्टाचार और दो नंबर की काली कमाई से करोड़ों का साम्राज्य स्थापित करने वाले आबकारी के रसूखदार लिपिक दिनेश दुबे को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अपनी पहुंच और रसूख के दम पर पीएमओ (PMO) के आदेश को ठेंगा दिखाने वाले इस दागी बाबू की हाईकोर्ट से मुंह की खानी पड़ी है। 

राज्य सरकार ने 22 जून 2026 को इस दागी लिपिक का तबादला बिलासपुर से बलरामपुर कर दिया था। अपने इस ट्रांसफर को रुकवाने के लिए बाबू ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट में उसने दलील दी थी कि इस तबादले से उसका प्रमोशन प्रभावित हो जाएगा। लेकिन आज हाई कोर्ट में जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने सुनवाई करते हुए बाबू की इस दलील को नामंजूर कर दिया और उसकी याचिका सिरे से खारिज कर दी।

कमिश्नर के पास भी पहुंची है नई शिकायत

हाई कोर्ट से तगड़ा झटका खाने वाले इस बाबू का जिन्न इन दिनों फिर बोतल से बाहर आ गया है। इस करोड़पति लिपिक के खिलाफ अब सीधे आबकारी कमिश्नर पदुम सिंह एलमा के पास भी गंभीर शिकायत पहुंची है। दस्तावेजों को देखते हुए कमिश्नर ने तुरंत नई जांच के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन जांच का जिम्मा राज्य उड़न दस्ते के उसी प्रभारी को दे दिया है, जिसने पिछली बार इस बाबू को बचाने में मदद की थी। ऐसे में सिस्टम पर भारी इस बाबू पर क्या कार्रवाई होगी, यह बड़ा सवाल है।

नोटबंदी में चपरासियों को बना दिया था एटीएम

आपको बता दें कि दिनेश दुबे के भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा 2017 में रिटायर्ड सहायक आयुक्त पीसी अग्रवाल ने खोला था। पीएमओ में शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस पर एफआईआर दर्ज की थी। पुरानी जांच रिपोर्ट में साबित हो चुका है कि नोटबंदी के दौरान इस बाबू ने आबकारी विभाग के चपरासियों (जीआर महार, हीरालाल, संतोष और नरेश) के बैंक खातों में लाखों रुपए डंप कर उन्हें अपना एटीएम बना लिया था। पत्नी और बेटे के खातों में भी जमकर पैसा खपाया गया था।

शहर से लेकर गांव तक खड़ी की बेतहाशा संपत्ति

सरकारी नौकरी में एक मामूली से पद पर रहते हुए दिनेश ने बेतहाशा संपत्तियां बटोरी हैं। कुदुदंड में आलीशान मकान, गंगानगर में दो मंजिला घर, भारतीय नगर और व्यापार विहार जैसे पॉश इलाकों में इसके घर हैं। चकरभाठा में दो फार्म हाउस और मस्तूरी के गृहग्राम पाराघाट में लंबी-चौड़ी खेती की जमीन इसी काली कमाई का नतीजा है। अब हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सालों से बिलासपुर में जमे इस बाबू को आखिरकार अपनी कुर्सी छोड़नी ही पड़ेगी। फिलहाल बाबू फिर से किसी नए रास्ते की तलाश में जुट गये है।